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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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स्वधा
पितरों के उद्देश्य से दिया जानेवाला अन्न या भोजन।
संज्ञा
स्त्री.

स्वन
शब्द, ध्वनि।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

स्वनामधन्य
जिसने अपने महान और गौरव-पूर्ण कार्यों से अपना नाम धन्य या प्रसिद्ध कर दिया हो।
वि.
(सं.)

स्वनित
ध्वनित, ध्वनियुक्त।
वि.
(सं.)

स्वपच
चांडाल।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्वपच)
उ.- ढूँढ़ि फिरे घर कोउ न बतायौ, स्वपच कोरिया लौं-१-१५१।

स्वपच
एक निम्नजातीय भक्त।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्वपच)
उ.- गायौ स्वपच परम अघपूरन-१-६५।

स्वपन, स्वपना
स्वप्न।
संज्ञा
पुं.
(सं. स्वपन)

स्वप्न
सोने की क्रिया या अवस्था, निद्रा।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

स्वप्न
निद्रावस्था में, ठीक-ठीक नींद न आने के कारण कुछ घटनाएँ आदि दिखायी देना।
संज्ञा
पुं.
(सं.)
उ.- बहुरि कहथौ, रिषि कौ कहि नाम ? कहथौ स्वप्न देख्यौ अभिराम-९-१७४।

स्वप्न
वह घटना आदि जो निद्रित अवस्था में दिखायी दे और जिसे साहित्य में एक संचारी भाव माना गया है।
संज्ञा
पुं.
(सं.)


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