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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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पंचमुख
सिंह।
संज्ञा
[सं.]

पंचमुखी
पाँच मुखवाला।
वि.
[सं. पंचमुखिन्]

पँचमेल
पाँच या अधिक तरह की।
वि.
[हिं. पाँच + मेल]

पँचमेल
मिली-जुली।
वि.
[हिं. पाँच + मेल]

पँचमेल
साधारण।
वि.
[हिं. पाँच + मेल]

पँचरंग, पंचरंगा
पाँच रंग का।
उ.-(क) पँचरंग सारी मँगाइ, बधू जननि पैहराइ-१०-९५। (ख) पगनि जेहरि लाल लहँगा अंग पँचरंग सारि-पृ. ३४४ (२९)।
वि.
[हिं. पाँच + रंग]

पँचरंग, पंचरंगा
रंग-बिरंगा।
वि.
[हिं. पाँच + रंग]

पंच रत्न
पाँच रत्न-सोना, हीरा, नीलम, लाल और मोती।
संज्ञा
[सं.]

पंचलड़ा
पाँच लड़ों का।
वि.
[हिं. पाँच + लड़]

पंचलड़ी, पंचलरी
पाँच लड़ों की माला।
संज्ञा
[हिं. पाँच + लड़ी]


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