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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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पंचतपा
पंचाग्नि तापनेवाला।
वि.
[सं. पंचतपस]

पंचतरु
मंदार, परिजात, संतान, कल्पवृक्ष और हरिचंदन।
संज्ञा
[सं.]

पंचता
मृत्यु।
संज्ञा
[सं.]

पँचतोलिया
एक तरह का बहुत महीन या झीना कपड़ा।
संज्ञा
[हिं. पाँच +तोला]

पंचत्व
पाँच का भाव।
संज्ञा
[सं.]

पंचत्व
मृत्यु।
संज्ञा
[सं.]

पंचत्व
पंचत्व (को) प्राप्त होना- मृत्यु होना।
मु.

पंचदश
दस और पँच पंद्रह।
वि.
[सं.]

पंचदेव
पाँच प्रधान देवता- आदित्य, रुद्र, विष्णु गणेश और देवी।
संज्ञा
[सं.]

पंचन
पंचों में।
उ.-साँची की झूठी करि डारैं पंचन मैं मर्यादा जाइ-१३१६।
संज्ञा
[सं. पंच + हिं. न, नि]


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