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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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पंचकवल
पाँच ग्रास जो भोजन के पूर्द निकाल दिये जाते हैं।
संज्ञा
[सं.]

पंचकाम
कामदेव के पाँच रूप-काम, मन्मथ, कंदर्प, मकरध्वज और मीनकेतु।
संज्ञा
[सं.]

पंचकोण
जिसमें पाँच कोने हों, पँचकोना।
वि.
[सं.]

पंचकोस, पंचकोश
काशी जो पाँच कोस लंबी-चौड़ी भूमि में बसी है।
संज्ञा
[सं.]

पंचकोसी
काशी की परिक्रमा।
संज्ञा
[हिं. पंचकोस]

पंचगव्य
दूध, दही, घी, गोबर, और गोमूत्र।
संज्ञा
[सं.]

पंचगीत
श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के पाँच प्रकरण-वेणगीत, गोपीगीत, युगलगीत, भ्रमरगीत और महिषी गीत।
संज्ञा
[सं.]

पंचजन
एक असुर जो श्रीकृष्ण के गुरु संदीपन का पुत्र चुरा ले गया था। श्रीकृष्ण ने इसे मारा था और इसी की हड्डियों से उनका 'पांचजन्य' शंख बना था।
संज्ञा
[सं.]

पंचतत्व
पाँच तत्व-पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश।
संज्ञा
[सं.]

पंचतत्व
मद्य, मांस, मत्स्य, मुद्रा और मैथुन (वाम मार्ग)।
संज्ञा
[सं.]


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