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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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स्लाधा
तारीफ, बड़ाई, प्रशंसा।
संज्ञा
स्त्री.
(सं. श्लाघा)

स्लाधा
खुशामद, चापलूसी।
संज्ञा
स्त्री.
(सं. श्लाघा)

स्लोक
संस्कृत का पद्य या अनुष्टुप छंद।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्लोक)
उ.-(क) श्रीमुख चारि स्लोक दए ब्रह्मा कौं समुझाइ-१-२२५। (ख) तब नारद तिनकैं ढिग आइ चारि स्लोक कहे समुझाइ-१-२३०।

स्वः
आकाश।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

स्वः
स्वर्ग।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

स्वःसरित, स्वःसरित्, स्वःसरिता
आकाशगंगा।
संज्ञा
स्त्री.
(सं. स्वःसरित)

स्वःसुंदरी
अप्सरा।
संज्ञा
स्त्री.
(सं. अप्सरा)

स्व
अपना, निज का।
वि.
(सं.)
उ.- स्व कर काटत सीस-१-१०६।

स्व
क प्रत्यय जो शब्दांत में जुडकर भाववाचकता, प्राप्य धन आदि का अर्थ देता है।
प्रत्य.

स्वकर्मी
केवल अपने ही काम से मतलब रखनेवाला, स्वार्थी।
वि.
(सं. स्वकर्मिन्)


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