पंच की भीख- सर्वसाधारण का आशीर्वाद, जनता की कृपा। उ.-(क) मैं- मेरी कबहूँ नहिं कीजै, कीजै पंच-सुहातौ-१-३०२। (ख) राज करैं वे धेनु तुम्हारी, नेतहिं कहति सुनाई। पंच की भीख सूर बलि मोहन कहति जसोदा माई-४५५।
पंच की दुहाई- समाज से धर्म या न्याय करने की पुकार।
पंच-परमेश्वर- समाज का मत ईश्वर का वाक्य है।
मु.
पंच
किसी बात का न्याय करने के लिए चुने गये पाँच या अधिक आदमी।
संज्ञा
पंचक
पाँच का समूह।
संज्ञा
[सं.]
पंचक
पाँच नक्षत्र जिनमें नये कार्य का करना मना है।
संज्ञा
[सं.]
पंचकन्या
पाँच नारियाँ जो विवाहादि होने पर भी कन्यावत् मान्य हैं-अहल्या, द्रौपदी, कुंती, तारा और मंदोदरी।