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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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न्योता
न्योते में दिया जाने वाला धन।
संज्ञा
[सं. निमंत्रण]

न्योली
पेट के नलों को पानी से साफ करने की हठयोगियों की क्रिया।
संज्ञा
[सं. नली]

न्यौछावर
निछावर, उत्सर्ग, वारा-फेरा, उतारा।
उ.- सूर कहा न्यौछावर करिंयै अपनैं लाल ललित लरखर पर-१०-९३।
संज्ञा
[हिं. निछावर]

न्यौति
निमंत्रण देकर, बुलाकर।
उ.- जग्य-पुरूष गए बैकुंठ धामहि जबै, न्यौति नृप प्रजा कौ तब हँकारयौ-४-११।
क्रि. स.
[हिं. न्योतना]

न्यौत्यौ
न्योता दिया, निमंत्रित किया।
उ.- इच्छा करि मैं ब्राम्हन न्यौत्यौ, ताकौं स्याम खिझावै-१०-२४९।
क्रि. स.
[हिं. न्योतना]

न्हवाइ
नहलाकर, स्नान करा कर।
उ.- जननी उबटि न्हवाइ (सिसु) क्रम सौं लीन्हें गोद-१०-४२।
क्रि. स.
[हिं. नहलाना]

न्हवायौ
नहलाया, स्नान कराया।
उ.- जज्ञ कराइ प्रयाग न्हयायौ-६-८।
क्रि. स.
[हिं. नहलाना]

न्हवावत
नहाते समय।
उ.-मैया, कबहिं बढ़ैगी चोटी।¨¨¨¨¨। काढ़त-गुहत न्हवावत जैहै नागिनि सी भुईं लोटी-१०-१७५।
क्रि. वि.
[हिं. नहाना]

न्हाइ
नहा कर, स्नान करके।
उ.- रिषि कह्यौ, आवंत हौं मैं न्हाइ-९-५।
क्रि. अ.
[हिं. नहाना]

न्हाउ
नहाओ, स्नान करो।
उ.- ग्रीषम कमल-बदन कुम्हिलैंहै, तजि सर निकट दूरि कित न्हाउ-९-३४।
क्रि. अ.
[हिं. नहाना]


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