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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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न्यायाधीश
प्रधान न्यायकर्त्ता।
संज्ञा
[सं.]

न्यायालय
अदालत, कचहरी।
संज्ञा
[सं.]

न्यायी
न्याय शील।
संज्ञा
[सं. न्यायिन्]

न्यायोचित
उचित, ठीक।
वि.
[सं.]

न्यार, न्यारा
अलग, पृथक, को साथ न हो।
उ.- ¨¨¨¨¨नाम स्रमिष्ठा तासु कुमारी। तासु देवयानी सौं प्यार। रहै न तासौं पल भर न्यार-९-१७४।
वि.
[सं. निर्निकट, प्रा. निन्निअड़, निन्नियर, पू. हिं. निन्यार, हिं. न्यारा]

न्यार, न्यारा
जो पास न हो।
वि.
[सं. निर्निकट, प्रा. निन्निअड़, निन्नियर, पू. हिं. निन्यार, हिं. न्यारा]

न्यार, न्यारा
भिन्न, अन्य।
वि.
[सं. निर्निकट, प्रा. निन्निअड़, निन्नियर, पू. हिं. निन्यार, हिं. न्यारा]

न्यार, न्यारा
निराला, अनोखा।
वि.
[सं. निर्निकट, प्रा. निन्निअड़, निन्नियर, पू. हिं. निन्यार, हिं. न्यारा]

न्यारी
निराली, विलक्षण, अनोखी।
उ.- परम रुचिर मनि-कंठ किरनि-गन, कुंडल-मुकुट प्रभा न्यारी-१-६९।
वि.
[हिं. न्यारा]

न्यारी
और ही, भिन्न, अन्य।
उ.- दूध बरा उत्तम दधिबाटी, गाल-मसूरी की रुचि न्यारी-१०-२२७।
वि.
[हिं. न्यारा]


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