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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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स्रवन
कान, कर्णेंद्रिय।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्रमण)
उ.- (क) स्रवन सुनत करुना-सरिता भए, बाढ़थौ बसन उमंगी-१-२१। (ख) स्रवन न सुनत-१-११८। (ग) रोचन भरि लै देत सींक सौं स्रवन-निकट अतिही आतुर की-१०-१८०।

स्रवन
बौद्ध संन्यासी।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्रवण)

स्रवन
मुनि।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्रवण)

स्रवना, स्रवनों
बहना।
क्रि.अ.
(सं. स्रवण)

स्रवना, स्रवनों
टपकना।
क्रि.अ.
(सं. स्रवण)

स्रवना, स्रवनों
गिरना।
क्रि.अ.
(सं. स्रवण)

स्रवना, स्रवनों
बहाना।
क्रि.स.

स्रवना, स्रवनों
टपकाना।
क्रि.स.

स्रवना, स्रवनों
गिराना।
क्रि.स.

स्रवति
बहा हुआ।
वि.
(हिं. स्राव)


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