प्रतिवर्तित प्रतिपरिवर्तित
प्रतिपरिवर्तन की क्रिया से प्राप्त निष्कर्ष का प्रतिवर्तन करने से प्राप्त वाक्य, अर्थात् किसी दिए हुए वाक्य का क्रमशः प्रतिवर्तन, परिवर्तन और पुनः प्रतिवर्तन करने से प्राप्त वाक्य।
उदाहरण : सभी उ वि हैं;
कोई उ-अ-वि नहीं है (प्रति.);
कोई अ-वि उ नहीं है (परि.)
∴ सभी अ-वि अ-उ हैं (प्रति प्रतिपरि.)।
Obverted Converse
प्रतिवर्तित-परिवर्तित
परिवर्तन से प्राप्त निष्कर्ष का प्रतिवर्तन करके प्राप्त होने वाला वाक्य या प्रतिज्ञप्ति।
उदाहरण : सभी स प हैं;
∴ कुछ प स है; (परिवर्तित)
∴ कुछ प अ-स नहीं हैं (प्रतिवर्तित परिवर्तित)
Obvertend
प्रतिवर्त्य
वह प्रतिज्ञप्ति जिसका प्रतिवर्तन किया जाना है। देखिए, `obversion`।
Occam'S Razor
ओकम-न्याय, लाघव-न्याय
वैज्ञानिक व्याख्या का एक सिद्धांत जिसके अनुसार `यदि आवश्यक न हो तो बहुत-सारी वस्तुओं की कल्पना नहीं करनी चाहिए` अथवा `यदि कम वस्तुओं से काम चल जाता है तो अधिक वस्तुओं को मानना व्यर्थ है।` यह सिद्धांत भारत में `कल्पना-लाघव` या `लाघव-न्याय` के नाम से बहुत पहले से प्रसिद्ध है और पश्चिम में भी ओकम (William of Occam, 1300-1349) के नाम से प्रसिद्ध होने के बावजूद पहले से प्रयोग में है।
Occasionalism
प्रसंगवाद, संयोगवाद
मन और शरीर के संबंध को समझने के लिये देकार्त के अनुयायियों गुलिंग्स तथा मेलब्रान्श (Malebranche) के द्वारा स्थापित सिद्धांत। इसके अनुसार मन एवं शरीर दोनों परस्पर विरूद्धधर्मी होने के कारण एक दूसरे पर क्रिया-प्रतिक्रिया नहीं कर सकते किन्तु फिर भी दोनों में संवादिता है, इस संवादिता का कारण ईश्वर है। ईश्वर किसी एक में परिवर्तन होने पर दूसरे में भी उसी प्रकार का परिवर्तन उत्पन्न कर देता है। जैसे : जब शरीर में कुछ परिवर्तन होते हैं, तब ईश्वर उन्हीं के अनुरूप मनस् में संवेदना उत्पन्न कर देता है और जब मन में कुछ इच्छाएँ या संकल्प उत्पन्न होते हैं तो ईश्वर उन्हीं के संवाद में शरीर में गति उत्पन्न कर देता है।
Occultism
गुह्यतंत्र, गुह्यविद्या
गुप्त, रहस्यमय या प्रेत में विश्वास तथा उन्हें वश में करने के लिए मंत्र-तंत्र और अन्य गुह्य साधनों का प्रयोग।
Occupant
अधिवासी
जॉनसन के अनुसार, वह द्रव्य जो स्थान घेरता है, अर्थात् सामान्य भाषा में भौतिक द्रव्य।
Occurrent
आपाती
जॉनसन के अनुसार, दिक्काल में अस्तित्व रखने वाली वस्तुओं के दो वर्गों में से एक : वह जिसका थोड़ी देर बाद अस्तित्व नहीं रहता, जैसे बिजली की कौंध।