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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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स्रम
दौड़-धूप।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्रम)

स्रम
पसीना।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्रम)

स्रम
साहित्य में संभोग आदि के कारण होनेवाली थकावट जिसकी गिनती संचारी भावों में की गयी है।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्रम)
उ.- सोभित सिथिल बसन मनमोहन सुखवत स्रम के पागे-६८६।

स्रम-कन
अधिक परिश्रम आदि के कारण शरीर से निकलनेवाली पसीने की बूदें।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्रमकण)

स्रम-जल
पसीना, स्वेद।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्रमजल)

स्रमन
बौद्ध संन्यासी।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्रमण)

स्रमन
यती, मुनि।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्रमण)

स्रमना, स्रमनो
श्रम या परिश्रम करना।
क्रि.अ.
(सं. श्रम + ना)

स्रमना, स्रमनो
थकना।
क्रि.अ.
(सं. श्रम + ना)

स्रम-बारि
पसीना, स्वेद।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्रम + वारि)


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