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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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नौबत
नौबत झड़ना (बजना)- (१) आंनदोत्सव होना। (२) प्रताप की घोषणा होना। नौबत बजावत- (१) खुशी मनाता है। उ.-निंदा जग उपहास करत, मग बंदीजन जस गावत। हठ, अन्याय अघर्म, सूर नित नौवत द्वार बजावत-१-१४१। (२) प्रताप या ऐश्वर्य की घोषणा करता है। नौबत बजाकर (की टकोर)- डंके की चोट पर, खुल्लमखुल्ला।
मु.

नौबती
नौबत बजानेवाला।
संज्ञा
[हिं. नौबत]

नौमासा
गर्भ का नवाँ महीना।
संज्ञा
[सं. नवमास]

नौमि
मैं नमस्कर करता हूँ।
पद.
[सं. नमामि]

नौमी
दोनों पक्षों की नवीं तिथि।
उ.-(क) नौमी-नेम भली बिधि करै-९-५। (ख) नौमी नवसत साजिकै हरि होरी है-२४११।
संज्ञा
[सं. नवमी]

नौरंग
(औरंगजेब) का रूपांतर।
संज्ञा
[हिं. औरंग]

नौरतन
नौनगा' नामक गहना।
संज्ञा
[सं. नवरत्न]

नौरतन
नौ मसालों की चटनी।
संज्ञा

नौरोज
पारसियों के नव वर्ष का नया दिन।
संज्ञा
[फ़ा.]

नौरोज
त्योहार या उत्सव का दिन।
संज्ञा
[फ़ा.]


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