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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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स्यों, स्यौं
पास, निकट।
अव्य.
(सं. सह)

स्रंग
पर्वत की चोटी, शिखर।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्रृंग)

स्रंग
चौपायों के सोंग।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्रृंग)

स्रंग
कँगूरा।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्रृंग)

स्रक, स्रक्, स्रग
फूलों की माला।
संज्ञा
स्त्री. पुं.
(सं. स्रक्)
उ.- (क) रचि स्रक कुसुम सुगंध सेज सजि बसन कुमकुमा बोरि-२८०७। (ख) स्रुति-कुंडल अरु पीत बसन स्रक वैसोइ साज बनाए-२९५९। (ग) स्रक चंदन बनिता विनोद रस-३२३०।

स्रक, स्रक्, स्रग
एक छंद।
संज्ञा
स्त्री. पुं.
(सं. स्त्रक)

स्रक, स्रक्, स्रग
एक वृक्ष।
संज्ञा
स्त्री. पुं.
(सं. स्त्रक)

स्रगाल
गीवड़, सियार।
संज्ञा
पुं.
(सं. श्रृगाल)

स्रग्‍धरा
एक वर्णवृत्त।
संज्ञा
स्त्री.
(सं.)

स्रग्वान, स्रग्वान्
जो हार या माला धारण किये हो।
वि.
(सं. स्रगवात्)


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