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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi)
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Non-Moral
निर्नैतिक वह जो नीति विहिन हो।

Non-Normative Ethics
अनियामक नीतिशास्त्र वह नीतिशास्त्र जो नियमों अथवा आदर्शों की स्थापना नहीं करता है।

Non-Reflexive Relation
न-परावर्ती संबंध ऐसा संबंध जो न परावर्ती हो और' न अपरावर्ती, जैसे 'प्रेम करना', 'घृणा करना', 'आलोचना करना', इत्यादि (क्योंकि अ का स्वयं से न ये काम करना जरूरी है और न ये काम न करना)।

Non-Symmetrical Relation
न-सममित संबंध वह संबंध जो यदि क का ख के साथ है तो ख का क के साथ कभी होता है और कभी नहीं होता, जैसे भाई का संबंधः यदि क 'ख' का भाई है तो ख 'क' का कभी भाई होता है और कभी बहन।

Non-Transitive Relation
न-संक्रामी संबंध वह संबंध जो न संक्रामी हो और न असंक्रामी, जैसे `प्रेम करना` (क्योंकि यदि अ ब से प्रेम करता है और ब स से प्रेम करता है, तो अ का स से न प्रेम करना जरूरी है और न उससे प्रेम न करना)।

Normative Science
नियामक आदर्श मूलक विज्ञान वह विज्ञान जो नियमों एवं आदर्शों का वैज्ञानिक ढंग से विवेचन करता है। जैसे : नीतिशास्त्र, सौंदर्यशास्त्र और तर्कशास्त्र।

Notiones Communes
सार्वजनीन प्रत्यय वह प्रत्यय जो सार्वजनीन हो। जैसे : दिक्, काल, कारण आदि। स्टोइक दार्शनिकों ने इस प्रत्यय का प्रयोग शुभाशुभ एवं ईश्वर के अस्तित्त्व के संदर्भ में किया है।

Noumenal World
पारमार्थिक जगत् कांट के दर्शन में अभिव्यक्त ऐसा जगत् जिसका ज्ञान हमें अपनी इन्द्रियों के द्वारा नहीं होता क्योंकि इसकी संवेदना प्राप्त करने में ये असमर्थ हैं। कांट इसे वस्तुओं का निज-स्वरूप (thing-in-it-self) कहते हैं और इसे ही वास्तविक जगत् मानते हैं।

Noumenon
परमार्थसत् कांट के अनुसार वह जो अलौकिक, अज्ञेय तथा अनुभवातीत सत् हो, परमार्थसत् कहलाता है।

Nous
नाउस, चित्ततत्त्व प्राचीन यूनानी दर्शन की एक आधारभूत अवधारणा जो एनेक्जेगोरस के दर्शन में पहली बार सुस्पष्ट रूप में अभिव्यक्त हुई। इसके अनुसार नाउस ही वह चेतन तत्त्व है जो आकारहीन भूत-द्रव्य को गढ़ता तथा व्यवस्थित करता है। कालान्तर में प्लेटो तथा विशेष रूप से अरस्तू इसकी प्रत्ययवादी परिभाषा करते हुए इसे समस्त रूपों का शाश्वत आत्म-अनुध्यान की अवस्था में रहने वाला रूप माना है। आगे चलकर नव्य-प्लेटोवादियो ने इसे विशेष महत्ता प्रादन करते हुए अरस्तूवाद के आधार पर इसकी एक, विशेष प्रकार के अतीन्द्रिय स्वत्व के रूप में व्याख्या की, जो जगत का अर्थ तथा निश्चित रूप, आकार प्रदान करता है।


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