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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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स्यालू
ओढ़नी उपरैनी।
संज्ञा
पुं.
(हिं. सालू)

स्याबज
वह पशु जिसका शिकार किया जाता हो।
संज्ञा
पुं.
(हिं. सावज)

स्याह
काले रग का,काला।
वि.
(फ़ा.)

स्याह
एक तरह का घोड़ा।
संज्ञा
पुं.

स्याहा
बही, खाँता, रोजनामचा।
संज्ञा
पुं.
(फ़ा. सियाही)
उ.- प्रभु जू मैं ऎसौ अमल कमायौ।¨¨¨¨¨¨ वासिल बाकी, स्याहा मुजमिल सब अधर्म की बाकी-१-१४३।

स्याही
रोशनाई, मसि।
संज्ञा
स्त्री.
(फ़ा.)

स्याही
कालापन, कालिमा।
संज्ञा
स्त्री.
(फ़ा.)
मुहा.- स्याही जाना-बालों का कालापन न बना रहना, युवावस्या बीत जाना।

स्याही
कलौंछ, कालिख, कालिमा।
संज्ञा
स्त्री.
(फ़ा.)

स्याही
एक जंतु।
संज्ञा
स्त्री.
(हिं. साही)

स्यों, स्यौं
साथ, सहित।
अव्य.
(सं. सह)
उ.- (क) सुनु सिख कंत, दंत तृन धरिकै, स्यौं परिवार सिंधारौ-९-११५। (ख) स्यौं परबत सर बैठि पवन-सुत, हौं प्रभु पै पहुँचाऊँ-९-१५५।


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