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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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नौ
जो दस से एक कम हो।
वि.
[सं. नव]

नौ
नौ दो ग्यारह होना- देखते-देखते भाग जाना। नौ तेरह बताना- टालटूल करना।
मु.

नौ
नया, नवीन।
उ.-जब लगि नहि बरषत ब्रज ऊपर नौ घन श्याम सरीर-२७७१।
वि.

नौआ
नाऊ, नाई, नापित।
उ.-रोवत देखि जननि अकुलानी दियौ तुरत नौआ कौं घुरकी-१०-१८०।
संज्ञा
[हिं. नाऊ]

नौकर
चाकर, दास, टहलुआ।
संज्ञा
[फ़ा.]

नौकर
वैतनिक कर्मचारी।
संज्ञा
[फ़ा.]

नौकरनी, नौकरानी
दासी।
संज्ञा
[हिं. नौकर]

नौकरी
चाकरी, सेवा।
संज्ञा
[हिं. नौकर]

नौका
नाव।
उ.-मेरी नौका जनि चढ़ौ त्रिभुवनपति राई-९-४२।
संज्ञा
[सं.]

नौग्रही
हाथ का एक गहना जिसमें नौ रत्म जड़े रहते हैं।
संज्ञा
[सं. नवग्रह]


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