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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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स्याना
चतुर, बुद्धिमान।
वि.
(सं. सज्ञान)

स्याना
चालाक, काइयाँ, धूर्त।
वि.
(सं. सज्ञान)

स्याना
जो बालक न हो, बड़ा, वयस्क।
वि.
(सं. सज्ञान)

स्याना
बड़ा-बूढ़ा या वृद्ध पुरुष।
संज्ञा
पुं.

स्याना
झाड़ फूँक करनेवाला।
संज्ञा
पुं.

स्यानापन
चतुराई, चातुरी।
संज्ञा
पुं.
(हिं. स्याना + पन)

स्यानापन
चालाकी, काइयाँपन, धूर्तता।
संज्ञा
पुं.
(हिं. स्याना + पन)

स्यानापन
वयस्क या स्याना होने की अवस्था।
संज्ञा
पुं.
(हिं. स्याना + पन)

स्यानि, स्यानी
चालाक।
वि.
स्त्री.
(हिं. स्याना)
उ.- आई सिखवन भवन पराऎं स्यानि ग्वालि बौरैया-३७१।

स्यापा
किसी संबंधी की मृत्यु पर परिवार और हेलमेल की स्त्रियों का कुछ दिन एकत्र होकर शोक मनाना और रोना-पीटना
संज्ञा
पुं.
(फ़ा. स्याहपोश)
मुहा.- स्यापा पड़ना-(१) रोना-पीटना होना। (२) (किसी स्थान का) बिलकुल उजाड़ या सूनसान हो जाना।


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