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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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नोखा
अनुठा, विचित्र।
वि.
[हिं. अनोखा]

नोखी
अनुठी, विचित्र।
उ.-कैंसी बुद्धि रची है नोखी देखी सुनी न होइ-पृ. ३१३ (३०)।
वि.
[हिं. नेखी]

नोखे
अनोखे, अद्भुत, विचित्र।
उ.-तब बृषभानु-सुता हँसि बोली, हम पै नाहिं कन्हाइ। काहे कौं झकझोरत नोखे, चलहु न देउँ बताइ-६८२।
वि.
[हिं. अनोखा]

नोच
लूट, खसोट।
संज्ञा
[हिं. नोचना]

नोचना
उखाड़ना।
क्रि. स.
[सं. लुंचन]

नोचना
नाखून से खरोंचना।
क्रि. स.
[सं. लुंचन]

नोचना
तंग करके ले लेना।
क्रि. स.
[सं. लुंचन]

नोचै
नोचता-खरोंचता है।
उ.-सत्य जानि जिय, चित चेत आनि, तू अब नख क्यौं तन नोचै-१० उ.-१०२।
क्रि. स.
[हिं. नोचना]

नोचू
नोचने-खसोटनेवाला।
वि.
[हिं. नोचना]

नोचू
माँग माँग कर या लेकर तंग करनेवाला।
वि.
[हिं. नोचना]


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