आत्म-यातना, देह-यातना
आध्यात्मिक उपलब्धि के लिए संयम और त्याग का आचरण करते हुए नैसर्गिक इच्छाओं का दमन तथा प्रायश्चित के रूप में अथवा तप इत्यादि के द्वारा शरीर को कष्ट देना।
Mosaic Philosophy
मोजेक दर्शन
विश्व को मोज़ेक के समान विभिन्न रूप-रंगों वाले मौलिक तत्वों से निर्मित माननेवाला सिद्धांत।
Multiformity
बहुरूपता
स्टेबिंग (Stebbing) के अनुसार, एक साथ देखी गई ऐसी घटनाओं का एक समूह जिनमें से कोई एक या अधिक अन्य अवसरों पर अन्य की अनुपस्थिति में घटित होती है : समूह घटनाओं के अलावा गुणों या विशेषताओं का भी हो सकता है।
Multiple Location Theory
अनेकत्र-स्थिति सिद्धांत, बहु-स्थिति सिद्धांत
न्यूटन आदि वैज्ञानिकों तथा सहज वस्तुवाद के स्थान परिसीमन सिद्धांत (simple location theory) के विपरीत हाइटहेड के द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत। इस सिद्धांत के अनुसार ऐसा समझना अत्यन्त भ्रामक है कि कोई भी वस्तु एक विशेष स्थान में सीमित रहती है। इसे स्थान परिसीमन का दोष कहते है। वस्तुतः कोई भी वस्तु-विशेष प्रक्षेपों का एक ऐसा समूह होती है जो अपने पड़ोस में और पड़ोस से भी प्रभावी हो सकती है एवं पड़ोस की कोई निश्चित सीमा नहीं होती है। इसके परिणामस्वरूप उसमें अनेक गुण आ जाते हैं जो परस्पर विरोधी तक भी हो सकते हैं। जैसे : एक सिक्के की दीर्घवृत्तीयता और वृत्तीयता।
Multiple Relation Theory
बहु-संबंध-सिद्धांत
निर्णय को निर्णयकर्त्ता का मन (विषयी) एवं बाह्य-पदार्थ (विषय) स्वीकार करने वाले दार्शनिकों का मत। इसके अनुसार निर्णय के एक घटक के रूप में निर्णय कर्त्ता का मन विषयी होता है एवं अन्य प्रतिज्ञप्ति के अंश होते हैं, जिन्हें विषयी एक निश्चित अर्थ प्रदान करता है।
Mundus Intelligibilis
प्रज्ञा-लोक
प्लेटो के अनुसार प्रज्ञागम्य सत्ताओं का लोक जिसमें दृश्य जगत् की प्रत्येक वस्तु का प्रतिमान विद्यमान रहता है।
Mysticism
रहस्यवाद
वह मत कि परम सत् अपरोक्षानुभूतिगम्य है। इसका ज्ञान, बुद्धि, तर्क एवं भाषा से परे है।
Naïve Realism
सहज यथार्थवाद
जन-साधारण का मत जो किसी छान-बीन के बिना ही बाह्य जगत् के अस्तित्त्व को सहज रूप से स्वीकार कर लेता है। सामान्य बुद्धि पर आधारित होने के कारण इसे सामान्य बुद्धि वस्तुवाद भी कहा जाता है और मनुष्य का स्वाभाविक दृष्टिकोण होने से इसे स्वाभाविक वस्तुवाद भी कहा जाता है।
Narrative Proposition
आख्यानात्मक प्रतिज्ञप्ति
जॉनसन के अनुसार, वह प्रतिज्ञप्ति जिसके उद्देश्य-पद के पहले कोई निर्देशात्मक या उपस्थापक विशेषण लगा होता है, जैसे, `एक छाताधारी सैनिक नीचे उतरा`, `वह व्यक्ति बड़े गुस्से में था` इत्यादि। इस तरह की प्रतिज्ञप्तियाँ उपन्यासों कथा-कहानियों और इतिहास की पुस्तकों में प्रायः होती हैं। जॉनसन ने `टीका-प्रतिज्ञप्ति` (commentary proposition) अर्थात् कोई सामान्य बात बताने वाली प्रतिज्ञप्ति से इसका भेद किया है।
Nativism
सहज ज्ञानवाद, प्रकृत ज्ञानवाद
जर्मन विचारक हेल्महोल्स (1821-1894) के द्वारा प्रतिपादित मत जिसके अनुसार मानवीय ज्ञान में निस्सन्देह कुछ ऐसे तत्त्व विद्यमान रहते हैं जो संवेदना से प्राप्त नहीं होते वरन् ये आनुवंशिक होते हैं। इसलिये ये प्रत्येक व्यक्ति को अनुभव-निरपेक्ष रूप से जन्म से ही प्राप्त होते हैं।