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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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नैपुण्य
दक्षता, निपुणता।
संज्ञा
[सं.]

नैमित्तिक
जो निमित्तवश किया जाय।
वि.
[सं.]

नैमिष
नैमिषारण्य तीर्थ।
संज्ञा
[सं.]

नैमिषारण्य
सीतापुर का एक तीर्थ।
संज्ञा
[सं.]

नैया
नाव, नोका।
संज्ञा
[हिं. नाव]

नैर
नगर।
संज्ञा
[सं. नगर]

नैर
जनपद।
संज्ञा
[सं. नगर]

नैरी
नगरी, देश, जनपद।
उ.-जाके घर की हानि होति नित, सो नहिं आनि कहै री। जाति-पाँति के लोग न देखति, और बसैहै नैरी-१०-३२४।
संज्ञा
[सं. नगर, हिं. नैर]

नैराश्य
निराशा का भाव।
संज्ञा
[सं.]

नैऋर्त
नैऋति संबंधी।
वि.
[सं.]


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