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Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi)
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Morality Of Masters
स्वामी नीति जर्मन दार्शनिक नीत्शे के द्वारा समाज के दो वर्गों एवं उनसे संबंधित दो प्रकार की नैतिकता में से एक। इस प्रकार की नैतिकता शक्तिशाली वर्ग से संबंधित है। चूँकि शक्तिशाली ही समाज का स्वामी होता है, अतः इस वर्ग की नैतिकता युद्ध, हिंसा, शौर्य, पराक्रम, उद्यम आदि वीरोचित गुणों से परिचालित होती है।

Morality Of Slaves
दास नीति जर्मन दार्शनिक नीत्शे के अनुसार, उपयोगिता के विचार से प्रेरित निति जिसे सेवक-वर्ग या शासित-वर्ग अपनाता है और जिसमें विनय, धैर्य, शांति, अहिंसा इत्यादि गुणों को प्रधानता दी जाती है।

Moral Law
नैतिक नियम विशेषतः कांटीय नीतिशास्त्र में, व्यावहारिक तर्कबुद्धि का वह निरपेक्ष आदेश कि केवल कर्तव्यबुद्धि से कर्तव्य करो और उसे कर्तव्य मानो जिसे तुम एक सार्वभौम सिद्धांत के रूप में स्वीकार कर सको।

Moral Optimism
नैतिक आशावाद वह मत कि संसार में नैतिक सुधार व उत्थान अवश्य होगा।

Moral Religion
नीतिप्रधान धर्म वह धर्म जो ईश्वर, परलोक आदि परिकल्पनाओं को छोड़कर नैतिकता को प्रधानता दैता है, जैसे बौद्ध धर्म।

Moral Sense Theory
नैतिक संवित्तिवाद मुख्य रूप से ब्रिटेन के शेफ्ट्सबरी और हचेसन नामक नीतिशास्त्रियों का वह सिद्धांत कि हमें कर्म के औचित्य और अनौचित्य का बोध अंतर्विवेक से हो जाता है : जिस प्रकार आँख, कान इत्यादि गुणों का साक्षात् ज्ञान कराने वाली इंद्रियाँ हैं, उसी प्रकार अंतर्विवेक नैतिक गुणों का साक्षात् ज्ञान कराने वाली इंद्रिय है।

Moral Sentiment Theory
नैतिक भाव सिद्धांत नीतिशास्त्र का वह सिद्धांत, जिसके अनुसार नैतिक औचित्य-अनौचित्य के निर्णय व्यक्ति के अनुमोदन अथवा अननुमोदन के भाव या संवेग पर आधारित है।

Moral Syllogism
नैतिक न्यायवाक्य अरस्तू ने नैतिक न्याय-वाक्य को एक बौद्धिक क्रिया की परिणति माना है : पहले व्यक्ति को नैतिक मानक का बोध होता है, फिर उसे परिस्थिति विशेष में कर्म-विशेष के उस मानक के अनुरूप होने का बोध होता है और तब वह तदनुसार आचरण करता है। इन तीनों चरणों को क्रमशः न्यायवाक्य का साध्य- आधारवाक्य, पक्ष-आधारवाक्य और निष्कर्ष के रूप में लिया जाता है।

Moral Theology
नैतिक धर्मशास्त्र, नैतिक ईश्वरमीमांसा संकुचित अर्थ में, धर्मशास्त्र की वह शाखा जो ईसाई धर्मावलंबियों के जीवन का ईश्वरीय इच्छा के संदर्भ में अध्ययन करती है। व्यापक अर्थ में, मानवीय जीवन की समस्या का, उसके नैतिक लक्ष्यों का, उसके नैतिक मानकों का और मानव के नैतिक आचरण का तथा इन सबका ईश्वर से जो संबंध है उसका अध्ययन करने वाला शास्त्र।

Mortalist
नश्वरवादी वह व्यक्ति जो यह विश्वास करता है कि मृत्यु के पश्चात् कुछ शेष नहीं रहता।


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