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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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स्मरण
किसी देखी, सुनी, कही, पढ़ी या अनुभव की हुई बात का फिर से याद या ध्यान में आना।
संज्ञा
पुं.
(सं.)
मुहा. स्मरण दिलाना-भूली हुई बात को याद कराना।

स्मरण
नौ प्रकार की भक्तियों में एक जिसमें उपासक निरंतर अपने उपास्य का ध्यान या याद किया करता है।
संज्ञा
पुं.
(सं.)
उ.- स्रवण कीर्तन स्मरण पादरत अरचन बंदन दास-सारा. ११६।

स्मरण
एक काव्यालंकार।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

स्मरणशक्ति
याद रखने की शक्ति।
संज्ञा
स्त्री.
(सं.)

स्मरणासक्ति
उपास्य के स्मरण या ध्यान के लिए होनेवाली आसक्ति जिसके फलस्वरूप उपासक हर समय उसका स्‍मरण करता है।
संज्ञा
स्त्री.
(सं.)

स्मरणीय
याद रखने योग्य।
वि.
(सं.)

स्मरता
कामदेव का भाव या धर्म।।
संज्ञा
स्त्री.
(सं.)

स्मरता
स्मरण का भाव या धर्म।
संज्ञा
स्त्री.
(सं.)

स्मर-दशा
विरह-दशा।
संज्ञा
स्त्री.
(सं.)

स्मर-दहन
कामदेव को भस्म करनेवाले शिवजी।
संज्ञा
पुं.
(सं.)


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