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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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नैन-अमीन
नेत्र रूपी अदालती या राजकीय कर्मचारी।
उ.-नैन अमीन, अधर्मिनि कैं बस, जहँ कौं तहाँ छयौ-१-६४।
संज्ञा
[सं. नयन + अ. अमीन]

नैननि
नेत्रों में, आँखों में।
उ.-सुत कुबेर के मत्त-मगन भए बिषै-रस नैननि छाए (हो)-१-७।
संज्ञा
[सं. नयन + नि प्रत्य.)]

नैन-पटी
आँख पर बांधने की कपड़े की पट्टी।
उ.-अपनी रुचि जित ही जित ऐंचति इन्द्रिय-कर्म-गटी। हौं तित हीं उठि चलत कपट लगि, बाँधे नैन-पटी-१-९८।
संज्ञा
[सं. नयन + हिं. पट्टी]

नैनसुख
एक सूती कपड़ा।
संज्ञा
[हिं. नैन + सुख]

नैना
नेत्र, आंखें।
उ.-(क) सूरदास उमँगे दोउ नैना, सिंधु-प्रवाह बह्यौ-१-२४७। (ख) नैना तेरे जलज जीत हैं, खंजन तैं अति नाचैं -१०-७१८।
संज्ञा
[सं. नयन]

नैना
राधा की एक सखी का नाम।
उ.-दर्बा, रंभा, कृष्ना, ध्याना मैना नैना रूप-१५८०।
संज्ञा

नैना
झुकना।
क्रि. अ.
[हिं. नवना]

नैना
झुकाना।
क्रि. स.
[हिं. नवाना]

नैनी
नयनवाली।
उ.-जा जल-शुद्ध निरखि सन्मुख ह्वै, सुन्दर सरसिज नैनी-९-११।
वि.
[हिं. नैन]

नैनूँ, नैनू
मक्खन।
संज्ञा
[सं. नवनीत]


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