मतवाले नैन- मद भरे नैन। रस भरे या रसीले नैन- नैन जिनमें रसिकता का भाव हो।
यौ.
नैन
नैन उठाना- (१) निगाह सामने करना। (२) बुरा व्यवहार करना।
नैन न उघारना- लज्जा या संकोच से आँख न खोलना।
नैन न जात उघारे- लज्जा या संकोच के कारण आँख खोलकर सामने न कर पाना। उ.- दुरलभ भयौ दरस दसरथ कौ सो अपराध हमारे। सूरदास स्वामी करुनामय नैन न जात उघारे-९-५२।
नैन चढ़ाना- झुँझलाहट, अनख या क्रोध से देखना।
नैन चढ़ाए डोलत- अनख या क्रोध से देखती घूमती है। उ.- कापर नैन चढ़ाए डोलत ब्रज में तिनुका तोर-१०-३१०।
नैन चलाना- (१) आँख मटकाकर संकेत करना। (२) अनख या क्रोध से देखना।
नैन चलावै- आँख चमकाकर या मटकाकर संकेत करती है। उ.-सखियनि बीच भरथौ घट सिर पर तापर नैन चलावै-८७५।
नैन चलावति- अनख या क्रोध से देखती हुई। उ.-कापर नैन चलावति आवति जाति न तिनका तोर-१०-३२०।
नैन जुड़ाना- आँखें शीतल होना, तृप्ति होना।
नैन जुड़ाने- नेत्रशीलत हुए, तृप्ति हुई। उ.-अँचवत तब नैन जुड़ाने-१०-१८३।
नैन भर आना- आँख में आँसू आना।
नैन भरि आए- नेत्रों में आँसू आ गये। उ.-देखत गमन नैन भरि आए गात गह्यौ ज्यौं केत-९-३९।
नैन भरि जोवना- खूब अच्छी तरह तृप्त होकर देखना।
नैन भरि जोवना- खूब अच्छी तरह देखले। उ.-चाहति नैंकु नैन भरि जोवै-१०-३।
नैन लगाना- टकटकी बांधकर देखना।
नैन रहे लगाइ- टकटकी बांधकर देखते रह गये। उ.-मथति ग्वालि हरि देखी जाइ। गए हुते माखन की चोरी, देखत छबि रहे नैन लगाइ-१०-२९८।
नैन सिराना- नेत्रों को परम तृप्ति मिलना।
नैन सिराए- आँखें ठंडी हुईं, बहुत सुख मिला। उ.-सिया-राम-लछिमन मुख निरखत सूरदास के नैन सिराए-९-१६८।