नवीन के प्रति विकर्षण
नवीन के प्रति घृणा की भावना अथवा नई परिस्थिति से भयभीत होने की प्रवृत्ति।
Mixed Effect
मिश्र कार्य
जब विभिन्न प्रकार के कार्य इस प्रकार मिले हों कि वे एक ही प्रकार का प्रभाव उत्पन्न करें, उसे मिश्र कार्य कहते हैं।
Mixed Hypothetical Syllogism
मिश्रित हेतुफलात्मक न्यायवाक्य
वह न्यायवाक्य जिसका साध्य-आधारवाक्य हेतुफलात्मक, पक्ष-आधारवाक्य निरूपाधिक तथा निष्कर्ष भी निरूपाधिक होता है।
उदाहरण : यदि वर्षा होती है तो उपज अच्छी होती है;
वर्षा हुई है;
∴ उपज अच्छी होगी।
Mnemic Causation
स्मृतिक कारणता
वह कारणता जिसमें अव्यवहित पूर्ववर्ती तत्त्वों के अतिरिक्त सुदूर अतीत में घटी हुई कोई घटना भी कार्योत्पत्ति के लिए उत्तरदायी होती है, (जैसा कि स्मृति के प्रसंग में होता है)।
Modalism
पर्यायवाद
द्वितीय एवं तृतीय शताब्दी ईसवी में ईसाई लोगों द्वारा मान्य एक सिद्धांत जिसके अनुसार `त्रयी` में सम्मिलित पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा एक ही द्रव्य के तीन पर्याय (रूप) हैं।
Modality
निश्चयमात्रा
(क) प्रतिज्ञप्तियों की वह विशेषता जिसके अनुसार वे आवश्यक, सम्भाव्य, सांयोगिक, असंभव हो सकती हैं।
(ख) आधुनिक तर्कशास्त्र में इसे प्रतिज्ञप्ति अथवा कथन का कतिपय `अधितार्किक मूल्यांकन मानते हुए उसके विश्लेषण की संभावना को प्रस्तुत करने वाला गुण माना गया है।
(ग) परम्परागत तर्कशास्त्र में प्रतिज्ञप्तियों को अनिवार्यता, सम्भाव्यता तथा वास्तविकता में विभाजित किया जाता है।
कांट के मत में भी इसी अर्थ को स्वीकार किया गया है।
Modal Logic
निश्चयमात्रक तर्कशास्त्र, प्रकारात्मक तर्कशास्त्र
वह तर्कशास्त्र जिसमें अनिवार्यता, संभाव्यता, असंभाव्यता की अवधारणाओं के तार्किक लक्षणों का अध्ययन किया जाता है। एक निश्चयमात्रिक कथन वह है जिसमें अनिवार्यता या संभाव्यता के संदर्भ में कुछ कहा जाता है। निश्चयात्मक तर्कशास्त्र के मूल प्रत्यय क्रिया-विशेषणों, सहायक क्रियाओं एवं क्रिया वाक्यांशों में व्यक्त होते हैं।
Modal Proposition
निश्चयमात्रक प्रतिज्ञप्ति
ऐसे कथन के द्वारा अभिव्यक्त प्रतिज्ञप्ति जिसमें उसकी निश्चयात्मकता की मात्रा को बताने वाला कोई शब्द जैसे - `अवश्य; सम्भाव्य` एवं `वास्तविक` जुड़ा हुआ हो।
Mode
पर्याय, प्रकार
सामान्यतः किसी द्रव्य या तत्त्व के गौण गुण जो द्रव्य या तत्त्व पर आश्रित होते हैं। देकार्त के दर्शन में पर्याय का यही अर्थ किया गया है। स्पिनोजा के दर्शन में पर्याय, द्रव्य के परिणामी धर्म या विकार माने गये हैं। उनके अनुसार पर्याय गुणों के विकार हैं न कि द्रव्य के, क्योंकि द्रव्य अपरिणामी है। लॉक के अनुसार पर्याय सरल प्रत्ययों का योग है, जो द्रव्य पर आश्रित है, अतः परतन्त्र है।
Modus Ponendo Ponens
विध्यात्मक हेतुफलानुमान
न्यायवाक्य का वह रूप जिसमें पक्ष आधारवाक्य में साध्य-आधारवाक्य के पूर्ववर्ती को स्वीकार करके निष्कर्ष में अनुवर्ती को स्वीकार किया जाता है।
उहाहरण : यदि प है, तो क है।
प है।
अतः क है।
प ⊃ क -प्रतीकात्मक
प
∴ क
यदि सूर्य है, तो प्रकाश है। - विधानात्मक
सूर्य है।
∴ प्रकाश है।