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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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स्पष्टवादी
स्पष्टवक्ता।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

स्पष्टीकरण
कोई बात इस प्रकार स्पष्ट करना कि वक्त पर संदेह न रहे।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

स्पष्टीकरण
कार्य-विशेष के संबंध में आपत्ति, आरोप आदि होने पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना और अपने आचरण के कारणों पर प्रकाश डालना।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

स्पृश्य
स्पर्श करने के योग्य हो।
वि.
(सं.)

स्पृष्ट
जिसका या जिससे स्पर्श हुआ हो, छुआ हुआ।
वि.
(सं.)

स्पृष्ट
वर्णोच्चारण का स्पष्ट प्रयत्न।
संज्ञा
पुं.

स्पृहण
इच्छा, अभिलाषा।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

स्पृहणीय
जिसकी या जिसके लिए इच्छा या कामना की जाय, वांछनीय।
वि.
(सं.)

स्पृहणीय
जो गौरव या बड़ाई के योग्य हो, गौरवशाली।
वि.
(सं.)

स्पृहा
इच्छा, कामना।
संज्ञा
स्त्री.
(सं.)


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