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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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नेरा
कुछ भी, जरा भी।
क्रि. वि.
[हिं. नियर]

नेरा
जो निकट हो, समीप का।
वि.

नेर, नेरे
निकट, पास, समीप।
उ.-(क) बिपति परी तब सब सँग छाँड़े, कोउ न आवै नेरे-१-७९। (ख) सूरस्याम बिन अंतकाल मैं कोउ न आवत नेरे-१-८५।
क्रि.वि
[हिं. नियर]

नेरै
निकट, पास।
उ.-तुम तौ दोष लगावन कौं सिर, बैठे देखत नेरैं-१-२०६।
क्रि.वि
[हिं. नियर, नेरे]

नेवछावर, नेवछावरि
निछावर।
उ.-हरकर पाट बंध नेवछावरि करत रतन पट सारी-२६३०।
संज्ञा
[हिं. निछावर]

नेवज
देवता को अर्पित करने की वस्तु, भोग।
उ.-(क) बरस दिवस को दिवस हमारो घर घर नेवज करौ चँड़ाई-९१०। (ख) बहुत भाँति सब करे पकवान। नेवज करि धरि साँझ बिहाने-१००८।
संज्ञा
[सं. नैवेद्य]

नेवत
न्योता, निमंत्रण।
संज्ञा
[हिं. न्योता]

नेवतना
नेवता भेजना।
क्रि. स.
निमंत्रण

नेवतहरी
निमंत्रित व्यक्ति।
संज्ञा
[हिं. न्योतहरी]

नेवता
निमंत्रण।
संज्ञा
[हिं. न्योता]


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