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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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स्पर्शमणि, स्पर्शमनि
पारस पत्थर।
संज्ञा
पुं.
(सं. स्पर्शमणि)

स्पर्शास्पर्श
छूताछूत।
संज्ञा
पुं.
(सं. स्पर्श + अस्पर्श)

स्पर्शी
छूनेवाला।
वि.
(सं. स्पर्शिन्)

स्पर्शेद्रिय
त्वचा, त्वगेंद्रिय।
संज्ञा
स्त्री.
(सं.)

स्पष्ट
साफ साफ दिखायी देने या समझ में आ सकनेवाला
वि.
(सं.)
मुहा.- स्पष्ट कहना या सुनाना-(बिना दुराव-छिपान के) साफ-साफ कहना।

स्पष्ट
जिसके संबंध में संदेह न हो।
वि.
(सं.)

स्पष्ट
व्यकरण में ('प' से 'म' तक के) वर्णों के उच्चारण का वह प्रयत्न जिसमें दोनों होंठ एक दूसरे से छू जाते है।
वि.
(सं.)

स्पष्टतया
साफ-साफ, स्पष्ट रूप से।
क्रि. वि.
(सं.)

स्पष्टता
स्पष्ट होने का भाव।
संज्ञा
स्त्री.
(सं.)

स्पष्टवक्ता
(बिना किसी संकोच या भय के) साफ और सच्ची बात कहनेवाला व्यक्ति।
संज्ञा
पुं.
(सं.)


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