logo
भारतवाणी
bharatavani  
logo
Knowledge through Indian Languages
Bharatavani

Hindu Dharmakosh (Hindi-Hindi)

गोपदत्रिरात्र (गोष्पदत्रिरात्र)
इस व्रत को भाद्र शुक्ल तृतीया या चतुर्थी को अथवा कार्तिक मास में प्रारम्भ करना चाहिए। तीन दिन तक गौओं तथा लक्ष्मीनारायण के पूजन का इसमें विधान है। सूर्योदय के समय व्रत की स्वीकृति तथा उसी दिन उपवास करना चाहिए। गौ के सींग और पूँछ को दही तथा घी से अभिषिञ्चित करना चाहिए। व्रती को चूल्हे में न पकाया हुआ खाद्य ग्रहण करना चाहिए। तैल तथा लवण वर्जित हैं। दे० हेमाद्रि, 2. 323-326 (भविष्योत्तर पुराण 191--16 से)। हेमाद्रि के अनुसार पूजन के समय 'माता रुद्राणाम्', (ऋग्वेद, अष्टम मण्डल, 101.15.1) मन्त्र का उच्चारण करना चाहिए।

गोपद्मव्रत
आश्विन मास की पूर्णिमा, अष्टमी, एकादशी अथवा द्वादशी को व्रत प्रारम्भ कर चार मास पर्यन्त तब तक किया जाय जब तक कृष्ण पक्ष की वही तिथि न आ जाय। इस व्रत को सभी कर सकते हैं, किन्तु विशेष रूप से इस व्रत का विधान नव विवाहितों के लिए है। गौ के पैर की प्रतिमा अपने गृह में, गोशाला में, विष्‍णुमन्दिर में, शिवालय में अथवा तुलसी के थाले के पास 33 बार अंकित कर पाँच वर्ष तक इस व्रत का अनुष्ठान करना चाहिए। इसके विष्णु देवता हैं। तदनन्तर उद्यापन का विधान है। व्रत के अन्त में गोदान करना चाहिए। दे० स्मृतिकौस्तुभ, 418-424; 604-608।

गोपाल
(1) भगवान् कृष्ण का एक लोकप्रिय नाम। भागवत धर्म में कृष्ण या वासुदेव के ईश्वरीकरण के विषय में विभिन्न विद्वानों के भिन्न-भिन्न मत हैं। रामकृष्ण गोपाल भण्डाकर वासुदेव एवं कृष्ण में अन्तर बतलाते हैं। उनका कहना है कि वासुदेव प्रारम्भ में सात्वत कुल के प्रमुख व्यक्ति थे, जो छठी शती ई० पू० में या इससे पूर्व हुए थे। उन्होंने अपने कुल के लोगों को एकेश्वरवाद की शिक्षा दी। तदनन्तर उनके अनुयायियों ने उन्हें व्यक्तिगत ईश्वर मानकर उनकी ही आराधना प्रारम्भ की। उन्हें पहले नारायण, फिर विष्णु और अन्त में मथुरा के गोपदेवता 'गोपाल कृष्ण' के रूप में माना गया। इस सम्प्रदाय में प्रसिद्ध दार्शनिक ग्रन्थ भगवद्गीता की रचना की गयी जो सैद्धान्तिक ग्रन्थ है। दे० उनका ग्रन्थ 'वैष्णविज्म, शैविज्म ऐण्ड अदर माइनर रेलिजस सेक्ट्स ऑफ् इन्डिया।' इस कथन में कल्पना का पुट अधिक है। 'गोविन्द', 'गोपाल' आदि कृष्ण के पर्याय बहुत पुराने हैं।
(2) व्रजमंडल में बसने वाले गोपों को भी गोपाल कहा गया है, जो वैकुंठवासी देवों के अवतार थे :
गोपाला मुनयः सर्वे वैकुण्ठानन्दमूर्तयः।

गोपालचम्पू
महात्मा जीव गोस्वामी द्वारा रचित कृष्णलीलासम्बन्धी काव्यग्रन्थ। गौडीय वैष्णव सम्प्रदाय में यह बहुत लोकप्रिय है।

गोपालतापनीयोपनिषद्
इसमें गोपाल कृष्ण के ब्रह्मत्व का निरूपण किया गया है। कृष्णोपासक वैष्णवों की यह विश्वस्त एवं प्रामाणिक उपनिषद् है।

गोपालनवमी
इस व्रत का अनुष्ठान नवमी के दिन करना चाहिए। समुद्रगामिनी नदी में स्नान करने का इसमें विधान है। कृष्ण भगवान् की पूजा होनी चाहिए।

गोपाल भट्ट
चैतन्यसम्प्रदाय के एक आचार्य। ये इस सम्प्रदाय के प्रारम्भिक छः गोस्वामियों में से एक थे। 'हरिभक्तिविलास' इस सम्प्रदाय का प्रसिद्ध ग्रन्थ है, जिसकी रचना सनातन गोस्वामी ने की। परन्तु यह गोपाल द्वारा भी रचित माना जाता है। भट्टजी दक्षिण देश के निवासी थे, बाद में चैतन्य महाप्रभु की आज्ञा से वृन्दावन में आकर आजीवन भगवान् की आराधना एवं ग्रन्थरचना करते रहे।

गोपालसहस्रनाम
सभी कृष्णभक्त सम्प्रदायों का धार्मिक स्तोत्र ग्रन्थ। इसमें भगवान् कृष्ण के एक सहस्र नामों का कीर्तन है।

गोपाष्टमी
कार्तिक शुक्ल अष्टमी को इस व्रत का अनुष्ठान होता है। इसी दिन भगवान् कृष्ण गोप बने थे। इसके देवता भी वे ही हैं। इसमें गौओं के पूजन का विधान है (दे० निर्णयामृत, 77 (कूर्म पुराण से))।

गोपिनी
वीराचार (तान्त्रिक) सम्प्रदाय के पश्वाचारी साधकों की पूजनीय नायिकाओं का एक प्रकार गोपिनी व्युत्पत्ति बतलायी गयी है :
आत्मानं गोपयेद् या च सर्वदा पशुसङ्कटे। सर्ववर्णोद्भवा रम्या गोपिनी सा प्रकीर्तिता।।


logo