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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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नेक
थोड़ा, तनिक, कुछ भी, किंचित।
उ.-सात दिन भरि ब्रज पर गई नेक न झार-९७३।
वि.

नेकी
भलाई।
संज्ञा
[फ़ा.]

नेकी
सज्जनता।
संज्ञा
[फ़ा.]

नेकी
उपकार।
संज्ञा
[फ़ा.]

नेकी
नेकी और पूछ पूछ- किसी का उपकार करने में पूछने की जरूरत क्या है?
मु.

नेकु, नेको, नेकौ
जरा भी।
उ.-तुम बिनु नँदनंदन ब्रजभूषन होत न नेको चैन-सा. ८।
वि.
[हिं. नेक]

नेकु, नेको, नेकौ
तनिक, कुछ, थोड़ा।
क्रि. वि.

नेग
शुभ अथवा प्रस,न्नता के अवसरों पर संबंधियों, आश्रितों आदि को कुछ देने का नियम।
संज्ञा
[सं. नैयमिक, हिं. नेवग]

नेग
वह धन, वस्तु आदि जो शुभ अवसरों पर संबंधियों, आश्रितों आदि को दिया जाता है, बँधा हुआ पुरस्कार।
उ.-लाख टका अरु झूमका (देहु) सारी दाइ कौं नेग-१०-४०।
संज्ञा
[सं. नैयमिक, हिं. नेवग]

नेग
नेग लगना- (१) पुरस्कार आदि देना आवश्यक होना। (२) सार्थक या सफल होना।
मु.


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