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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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नृसिंह
भगवान विष्णु का चौथा अवतार जिसका आधा शरीर मनुष्य का और आधा सिंह का था। हिसण्यकशिपु को मारने के लिए यह अवतार धारण किया गया था।
संज्ञा
[सं.]

नृसिंह चतुर्दशी
वैशाख शुक्ल चतुर्दशी जब नृसिंहावतार हुआ था।
संज्ञा
[सं.]

नृहरि
नृसिंह।
संज्ञा
[सं.]

ने
भूतकालिक सकर्मक क्रिया के कर्ता की विभक्ति।
प्रत्य.
[सं. प्रत्य टा-एण]

नेउछाउरि
निछावर।
संज्ञा
[हिं. न्योछावर]

नेउतना
न्योता देना।
क्रि. स.
[हिं. न्योतना]

नेउता
न्योता, निमंत्रण।
संज्ञा
[हिं. न्योता]

नेक
भला, अच्छा।
वि.
[फ़ा.]

नेक
सज्जन।
वि.
[फ़ा.]

नेक
थोड़ा, तनिक, कुछ, किंचित।
उ.-(क) नरक कूपनि जाइ जमपुर परथौ बार अनेक। थके किंकर-जूथ जमके, टरत टारैं न नेक-१-१०६। (ख) ढाकति कहा प्रेमहित सुंदरि सारँग नेक उघारि-२२२०।
क्रि. वि.
[हिं. न + एक]


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