मूल्य - निर्णय
निर्णय का वह प्रकार जो किसी वस्तु का तार्किक, नैतिक या सौंदर्य - शास्त्रीय मूल्यांकन करता है, अर्थात् किसी बात को सत्य या असत्य, अच्छी या बुरी, सुन्दर या असुन्दर बताने वाला निर्णय। इस तरह के निर्णय मानकीय नियामक विज्ञानों के अंतर्गत आते हैं।
Jural Ethics
विधिक नीतिशास्त्र
वह नीतिशास्त्र या नीतिशास्त्रीय सिद्धांत जो विधिशास्त्र का अनुसरण करते हुए साध्य और शुभ की अपेक्षा नियम और उसके अनुसरण तथा औचित्य के संप्रत्ययों को प्रमुखता देता है।
Justice
न्याय, नायायशीलता
प्लेटो के द्वारा स्वीकृत चार मुख्य सद्गुणों में से एक। यह तब होता है जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपना कार्य सुचारू रूप से करता है और दूसेर के कार्य में कोई बाधा नहीं डालता फलस्वरूप, समाज में पूर्ण सामंजस्य रहता है। इसकी आधुनिक अवधारणा में मुख्य तत्व है, नियमों का पालन, स्वतंत्रता, समानता, निष्पक्षता तथा योग्यतानुसार प्राप्ति।
Kalology
सौंदर्यशास्त्र
मॉन्टेग्यू के अनुसार, वस्तुओं एवं चरित्र की सुन्दरता का अध्ययन करने वाला शास्त्र।
Kantianism
कांटवाद
प्रसिद्ध जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट (1724 - 1804) का दर्शन, जो ज्ञान में कुछ प्रागनुभविक मानसिक तत्त्वों का महत्व स्वीकारता है और वस्तुओं के तात्त्विक स्वरूप को अज्ञेय मानता है।
Kathenotheism
एकैकाधिदेववाद
देखिए `henotheism`।
Kenotism
आत्मरेचनवाद, दिव्यत्वत्यागवाद
ईसाई धर्मावलंबियों का वह विश्वास कि ईसा ने मानव - रूप धारण करने में अपने कुछ दिव्य गुणों का त्याग किया था।
Kind
1. वर्ग : अन्य वस्तुओं में न पाए जाने वाले एक ऐसे लक्षण से युक्त वस्तुओं का समूह जो उनमें समान हों।
2. जाति : जे. एस. मिल के अनुसार, प्राकृतिक वर्ग, जैसे कोई जीव - जाति, जिसके सदस्यों में परिभाषक गुणधर्म के अलावा अन्य असंख्य गुणधर्म भी समान होते हैं।
Kingdom Of Ends
साध्यलोक, साध्यजगत्
कांट के अनुसार, वह आदर्श जगत जिसमें प्रत्येक व्यक्ति साध्य होगा और कोई व्यक्ति साधन मात्र नहीं होगा, प्रत्येक व्यक्ति विवेक से काम लेते हुए निरपेक्ष आदेश का पालन करेगा तथा दूसरे के सुख को वही प्रधानता देगा जो स्वयं अपने सुख को देता है और इस तरह अन्य लोगों के साथ सामंजस्य स्थापित किए रहेगा।
Knowledge By Acqaintance
परिचयाश्रित ज्ञान
सम्मुख उपस्थित वस्तु, व्यक्ति या गुण का ज्ञाता को होने वाला अपरोक्ष ज्ञान। वस्तुतः इसका प्रयोग इन्द्रिय प्रदत्तों के लिए ही होता है, परन्तु अब सामान्यतः इन प्रदत्तों के माध्य से होने वाले वस्तु (मेज़ इत्यादि ) और व्यक्ति के प्रत्यक्ष को भी इसके अंतर्गत माना जाता है।