पृथक्तावाद
एक सौंदर्यशास्त्रीय मत जिसके अनुसार किसी भी कलाकृति को सम्यक् रूप से समझने के लिए एकाग्र होकर किसी भी बाहरी तत्व की ओर ध्यान दिए बिना उसे देखते, सुनते या पढ़ते जाना आदि आवश्यक होता है। अंतर के लिए देखिए `contextualism`।
Isosthenia
समबलता
वह अवस्था जिसमें किसी बात के पक्ष और विपक्ष में प्रमाण या तर्क बिल्कुल बराबर शक्ति का होता है।
Iterated Modality
पुनरावर्ती प्रकारता
निश्टयमात्र - सूचक शब्द की आवृत्ति से प्रकट निश्चयमात्र, जैसे `संभवतः संभव` या `अनिवार्यतः अनिवार्य`।
Ius Divinum
दैवी नियम, दैवी विधि
स्कॉलेस्टिक दर्शन में, विशेषतः टॉमसीय दर्शन में, प्रकृति और मानव समाज दोनों को अटूट व्यवस्था में बाँधनेवाला ईश्वरीय नियम।
Iustitia Naturalis
स्वाभाविक नीतिपरायणता
मनुष्य के अन्दर विद्यमान नैतिक मार्ग पर चलने की स्वाभाविक प्रवृत्ति, जिसकी प्रेरणा कहीं बाहर से नहीं आती।
Institia Originalis
आदिम नीतिपरायणता
ईसाई धर्म के अनुसार मनुष्य को जन्म या सृष्टि के समय ईश्वर के द्वारा प्रदत्त मीतिनिष्ठता, जिसे पतन के पूर्व आदम में विद्यमान माना गया है।
Joint Denial
संयुक्त निषेध
दो प्रतिज्ञाप्तियों के एक साथ निषेध के लिए प्रतीकात्मक तर्कशास्त्र में प्रयुक्त एक चिह्न (↓)।
Joint Method Of Agreement And Difference
संयुक्त - अन्वय - व्यतिरेक विधि
मिल के तर्कशास्त्र में, कार्यकारण का संबंध निर्धारित करने की एक विधि, जिसका सूत्र यह है : यदि एक घटना के घटने के कई दृष्टांतों में एक परिस्थिति समान रूप से विद्यामान रहती है और उस घटना के न घटने के कई दृष्टांतों में अन्य बातों के प्रायः समान रहते हुए उस परिस्थिति का भी अभाव रहता है, तो उस घटना तथा परिस्थिति में कार्य - कारण का संबंध है।
उदाहरण : यदि एक व्यक्ति अनेक बार यह देखता है कि जब भी उसने खीर खाया, उसके पेट मे दर्द हुआ, और खीरा न खाने पर पेट में दर्द नहीं हुआ, तो खीरा खाना पेट के दर्द का कारण है।
Judgement Of Fact
तथ्य - निर्णय
वस्तुस्थिति को बतानेवाला या बताने का दावा करने वाला निर्णय जैसे, चंद्रमा एक ठंडा उपग्रह है। इस प्रकार के निर्णय प्राकृतिक या वर्णनात्मक विज्ञानों के क्षेत्र में आते हैं।
Judgement Of Taste
सौंदर्य - निर्णय
किसी वस्तु के बारे में यह कथन कि वह सुुन्दर, कलात्मक या मनोरम है। इस प्रकार के कथन मूल्यनिर्णय के सामान्य वर्ग में आते हैं।