logo
भारतवाणी
bharatavani  
logo
Knowledge through Indian Languages
Bharatavani

Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi)
A B C D E F G H I J K L M N O P Q R S T U V W X Y Z

Please click here to read PDF file Definitional Dictionary of Philosophy (English-Hindi)

Intellectus Ectypus
संवेदनाश्रित बुद्धि कांट के अनुसार, वह बुद्धि जो अपने प्रत्ययों या प्रक्रियाओं के लिए सामग्री इंद्रियानुभव या संवेदनों से प्राप्त करती है।

Intelligible
बुद्धिगम्य सामान्य अर्थ में, वह जो समझ में आ सके, विशेष रूप से वह जो केवल बुद्धि से ही जाना जा सकता हो, इंद्रियों से नहीं।

Intelligible Species
बुद्धिगम्य प्रतिरूप टॉमस एक्विनस के अनुसार, 'संवेदी प्रतिरूप' का क्रियात्मक के द्वारा परिष्कृत रूप : 'संवेदी प्रतिरूप' भौतिक वस्तु का संवेदन से प्राप्त प्रतिरूप होता है; सक्रिय बौद्धिक-शक्ति उसे आत्मा के द्वारा ग्राह्य बनाने के लिए उसके स्थूल भौतिक अंशों को हटाकर उसे यह रूप प्रदान करती है, जो उस वस्तु का सामान्य प्रत्यय होता है।

Intension
गुणार्थ पारंपरिक तर्कशास्त्र में, किसी वस्तु के संप्रत्यय में समाविष्ट सार गुणों का समूह।

Intensive Quality
प्रकर्षशील गुण, सघन गुण कोहेन और नेगेल (Cohen & Nagel) के अनुसार, ऐसा गुण जिसमें कुछ जोड़ा-घटाया न जा सके और इसलिए जिसके बारे में `कितना` और `कितने गुना` पूछना निरर्थक हो, जैसे मृदुता, बुद्धिमता इत्यादि। इसका extensive quality से भेद किया गया है।

Intentionality
साभिप्रायता, सोद्देश्यता पदार्थ को निर्दिष्ट करने वाली चेतना का गुण। आवश्यक नहीं कि अभिप्रेत पदार्थ सत् या अस्तित्ववान ही हो। उसका निर्देश, संदर्भ मानसिक क्रिया से होता है। साभिप्रायताः स्कॉलेस्टिक दर्शन में तथा वर्तमान में ब्रेन्टानों और मीनाँग के दर्शन में भी प्रयुक्त।

Intentional Theory Of Mind
साभिप्राय मन-सिद्धांत ब्रेन्टानों आदि का वह सिद्धांत जिसके अनुसार मनस सदैव विषयोन्मुखी होता है।

Interactionism
अन्तः क्रियावाद, क्रियाप्रतिक्रियावाद मन और शरीर का संबंध स्पष्ट करने के लिए देकार्त द्वारा प्रस्तावित वह सिद्धांत कि मन तथा शरीर परस्पर एक-दूसरे पर क्रिया-प्रतिक्रिया करते हैं।

Intercession
परार्थप्रार्थना ईसाई धर्म में, ईश्वर से दूसरों के लिए प्रार्थना।

Interjectionism
उद्गारवाद वह सिद्धांत कि अच्छा-बुरा, शुभ-अशुभ बताने वाले मूल्य-निर्णय किन्हीं वस्तुनिष्ठ विशेषताओं को प्रकट नहीं करते अपितु वक्ता के निजी भावों या संवेगों को व्यक्त करने वाले उद्गार मात्र होते हैं।


logo