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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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नील
राम की सेना का एक बंदर।
उ.-सीय-सुधि सुनत रघुबीर धाए। चले तब लखन, सुग्रीव, अंगद, हनू, जामवँत, नील, नल, सबै आए-९-१०६।
संज्ञा

नील
नव निधियों में एक।
संज्ञा

नील
नीलम।
संज्ञा

नील
विष।
संज्ञा

नील
माहिष्मती का एक राजा।
संज्ञा

नील
एक संख्या जो दस हजार अरब की होती है।
उ.-सिर पर धरि न चलैगौ कोऊ, जो जतननि करि माया जोरी। राजपाट सिंहासन बैठो, नील पदुम हूँ सौं कहै थोरी-१-३०३।
संज्ञा

नीलकंठ
जिसका कंठ नीला हो।
वि.
[सं.]

नीलकंठ
मयूर, मोर।
संज्ञा

नीलकंठ
एक पक्षी।
संज्ञा

नीलकंठ
शिव जी।
संज्ञा


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