नील का टीका लगना- कलंक लगना।
नील का टीका लगाना- कलंकी सिद्ध कर देना।
नील कौ खेत- कलंक का स्थान। उ.-सेवा नहिं भगवंत चरन की, भवन नील कौ खेत-२-१५।
नील की सलाई फिरवाना- आँखें फुड़वा देना।
नील घोटना- किसी बात को लेकर बहुत देर तक उलझना।
नील जलाना- पानी बरसाने के लिए नील जलाने का टोटका करना।
नील बिगड़ना- (१) चरित्र बिगड़ना। (२) चेहरे की आकृति बिगड़ना। (३) कलंक की बात फैलना। (४) बुद्धि ठिकाने न रहना। (५) दुर्दशा होना। (६) दिवाला निकलना।
मु.
नील
शरीर पर पड़नेवाला चोट का नीला निशान।
संज्ञा
नील
नील डालना- इतना मारना कि शरीर पर मार के नीले-काले निशान बन जायें।