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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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नीरोग
जो रोगी न हो, स्वस्थ।
वि.
[सं.]

नीलंगु
भौंरा।
संज्ञा
[सं.]

नीलंगु
फल।
संज्ञा
[सं.]

नील
नीले या गहरे आसमानी रंग का।
वि.
[सं.]

नील
नीला या गहरा आसमानी रंग।
संज्ञा

नील
एक पौधा जिससे यह रंग निकाला जाता है।
संज्ञा

नील
नील का टीका लगना- कलंक लगना। नील का टीका लगाना- कलंकी सिद्ध कर देना। नील कौ खेत- कलंक का स्थान। उ.-सेवा नहिं भगवंत चरन की, भवन नील कौ खेत-२-१५। नील की सलाई फिरवाना- आँखें फुड़वा देना। नील घोटना- किसी बात को लेकर बहुत देर तक उलझना। नील जलाना- पानी बरसाने के लिए नील जलाने का टोटका करना। नील बिगड़ना- (१) चरित्र बिगड़ना। (२) चेहरे की आकृति बिगड़ना। (३) कलंक की बात फैलना। (४) बुद्धि ठिकाने न रहना। (५) दुर्दशा होना। (६) दिवाला निकलना।
मु.

नील
शरीर पर पड़नेवाला चोट का नीला निशान।
संज्ञा

नील
नील डालना- इतना मारना कि शरीर पर मार के नीले-काले निशान बन जायें।
मु.

नील
कलंक, लांछन।
संज्ञा


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