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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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नीरस
आनंदरहित।
उ.-(क) पिउ पद-कमल कौ मकरंद। मलिन मति मन मधुप, परिहरि, बिषय नीरस मंद-९-१०। (ख) जीवै तो राजसुख भोग पावै जगत मुए निर्बान नीरस तुम्हारो-१० उ.-५७।
वि.
[सं.]

नीरस
जलरहित।
उ.-सूरदास क्यों नीर चुवत है नीरस बचन निचोयो-३४८२।
वि.
[सं.]

नीरांजन
आरती, दीपदान।
संज्ञा
[सं.]

नीरांजना
आरती करना।
क्रि. अ.
[सं. नीरांजन]

नीरांजनी
आरती।
संज्ञा
[सं.]

नीरा
पास, समीप।
क्रि. वि.
[हिं. नियर]

नीरा
ताड़ के वृक्ष का बहुत स्वादिष्ट, गुणकारी और मस्त कर देनेवाला रस।
संज्ञा
[सं. नीर]

नीराजन
देवता की आरती।
संज्ञा
[सं. नीरांजन]

नीराजना
आरती करना।
क्रि. अ.
[हिं. नीराजना]

नीरे
पास, समीप।
उ.-तुम इक कहत सकल घटै ब्यापक अरु सबही के नीरे-३१९८।
क्रि. वि.
[हिं. नियरे]


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