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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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स्तिमित
तर, गीला, आर्द्र।
वि.
(सं.)

स्तिमित
स्थिर, निश्चल।
वि.
(सं.)

स्तिमित
शांत।
वि.
(सं.)

स्तिमित
प्रसन्न, संतुष्ट।
वि.
(सं.)

स्तीर्ण
दूर तक फैला हुआ, विस्तुत।
वि.
(सं.)

स्तीर्ण
इधर-उधर बिखरा हुआ, विकीर्ण।
वि.
(सं.)

स्तुत
जिसकी स्तुति की गयी हो।
वि.
(सं.)

स्तुति
प्रशंसा, गुणकथन, प्रार्थना।
संज्ञा
स्त्री.
(सं.)
उ.- (क) कपिल स्तुति तिहिं बहु बिधि कीन्हीं-९-९। (ख) अकूर बिमल स्तुति गानै-२५५७। (ग) लोक-लोकन बिदित कथा तुरतही गई, करन स्तुतिहिं जहाँ तहाँ आए-२६१८।

स्तुतिवादक
स्तुति या प्रशंसा करनेवाला।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

स्तुतिवादक
खुशामदी, चाटुकार।
संज्ञा
पुं.
(सं.)


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