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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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नीरद
जिसके दाँत न हों।
वि.
[सं. निः + रद]

नीरधर
बादल, मेघ।
संज्ञा
[सं.]

नीरधि
समुद्र।
उ.-पसुपति मंडल मध्य मनो मनि छीरधि नीरधि नीर के-२५९९।
संज्ञा
[सं.]

नीरना
बिखेरना, छिटकाना।
क्रि. स.
[देश.]

नीरनिधि
समुद्र।
संज्ञा
[सं.]

नीरपति
वरुण देवता।
संज्ञा
[सं.]

नीरव
जिसमें शब्द न हो, निःशब्द।
वि.
[सं.]

नीरव
जो बोलता न हो, चुप।
वि.
[सं.]

नीरस
रसहीन।
वि.
[सं.]

नीरस
शुष्क।
वि.
[सं.]


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