वास्तविक प्रभुता, वास्तविक संप्रभुता, यथार्थ प्रभुसत्ता, तथ्यतः संप्रभुता राज्य की वह इकाई अथवा अंग जिसके द्वारा वास्तव में राज्य की संप्रभु शक्ति का प्रयोग किया जाता है चाहे वैज्ञानिक रूप से यह शक्ति किसी अन्य इकाई अथवा अंग में निहित हो।
Space law
अंतरिक्ष क़ानून, अंतरिक्ष विधि 1957 में सेवियत यान स्पुतनिक के अंतरिक्ष में भेजे जाने से मानव प्रयास के एक नए क्षेत्र का द्वार खुल गया जिसे बाहय अंतरिक्ष कहा जाता है। तुरंत ही राज्यों के मध्य इस भावना ने जन्म लिया कि अंतरिक्ष के अन्वेषण के लिए सभी राज्यों को समान अधिकार होना चाहिए और अंतरिक्ष अधःस्थित राज्य के प्रादेशिक क्षेत्राधिकार में नहीं होना चाहिए। इस भावना को मूर्त रूप देने के लिए संयुक्त राष्ट्र की महा सभा ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें अंतरिक्ष को महा समुद्रों के समान सामुदायिक प्रदेश घोषित किया गया और अंतरिक्ष की व्यवस्था संबंधी सिद्धांतों का भी निरूपण किया गया। 1968 में इन सिद्धांतों को वैधानिक रूप देने के उद्देश्य से एक संधि हुई जिसे संक्षेप में अंतरिक्ष संधि कहा जाता है। इस संधि से उस नियमावली का प्रारंभ होता है जिसे `अंतरिक्ष विधि` कहा जाता है।
Special session
विशेष अधिवेशन, विशेष सत्र किसी संसदीय निकाय अथवा अंतर्राष्ट्रीय संगठन की नियमित बैठकों के अतिरिक्त किसी विशेष प्रयोजन के लिए बुलाई गई विशिष्ट बैठक।
Sopils system
पद-पुरस्कार व्यवस्था उच्च सरकारी पदों पर योग्यता के आधार पर भर्ती न करके मुख्य कार्यपालक द्वारा उन्हें अपने व्यक्तिगत अथवा राजनीतिक समर्थकों एवं रिश्तेदारों और सगे-संबंधियों में मनमाने ढंग से बाँट देना मानों ये पद कोई लूट का माल हो। यह प्रथा प्रतियोगी परीक्षाओं के लागू किए जाने से पूर्व सरकारी भर्तियों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में सामान्यतः प्रचलित थी।
Stalemate
गत्यवरोध 1. वह स्थिति जिसमें विभिन्न पक्ष इस प्रकार से स्थित हों कि कोई प्रतिद्वंद्वी प्रतिपक्ष के विरुद्ध विजय या श्रेष्ठता पाने की आशा न कर सके। 2. किसी समस्या के समाधान में विभिन्न पक्षकारों के द्वारा कठोर दृष्टिकोण अपनाए जाने के कारण कोई समाधान न हो पाने की स्थिति।
Standing army
स्थायी सेना सवेतन सैनिकों की स्थायी रूप से सुसंगठित सेना।
Stare decisis
निर्णीतानुसरण पूर्व न्यायिक निर्णयों में निर्धारित या सूत्रबद्ध नियमों का अनुपालन करने का सिद्धांत या नीति।
State
राज्य `राज्य` की परिभाषा अनेक विद्वानों ने अनेक प्रकार से की है। राजनीति विज्ञान के जनक अरस्तू ने `राज्य` की परिभाषा करते हुए लिखा है कि `राज्य` ऐसे परिवारों और ग्रामों का समूह है जो आत्मनिर्भर और समृद्ध जीवन व्यतीत करने के लिए संगठित किया गया हो। ब्लंट्श्ली के अनुसार राज्य एक निर्दिष्ट प्रदेश की राजनीतिक दृष्टि से संगठित जनता है। लास्की के मतानुसार, `राज्य वह प्रादेशिक समाज है जो सरकार और प्रजा में विभाजित है और अपने नियत भौगोलिक क्षेत्र में अन्य समस्त व्यवस्थाओं पर सर्वोच्च सत्ता का उपभोग करता है`। गार्नर के शब्दों में `राज्य मनुष्यों के उस समुदाय का नाम है जो संख्या में अधिक हो या कम परंतु जो किसी निश्चित भूखंड पर स्थायी रूप से बसा हुआ हो, जो किसी भी बाहयशक्ति के नियंत्रण से पूर्णतया या प्रायः स्वतंत्र हो और जिसमें एक ऐसी सुसंगठित सरकार विद्यमान हो जिसके आदेश का अनुपालन करने के लिए उस भूखंड के प्रायः सब निवासी अभ्यस्त हो`। गार्नर की परिभाषा में `राज्य` के चारों मूल तत्वों जनसंख्या, प्रदेश, शासन और प्रभुसत्ता का समावेश है।
State capitalism
राजकीय पूँजीवाद वह व्यवस्था जिसमें राज्य स्वयं पूँजीवादी भूमिका अपना लेता है और सभी उद्योग-धंधे, कृषि, व्यवसाय प्रायः राज्य के स्वामित्व एवं नियंत्रण में कर लिए जाते हैं। यद्यपि यह समाजवाद के समरूप प्रतीत होता है तथापि, वासतव में, इसका संचालन समाजवाद के अनुरूप न होकर राज्य के उच्च पदाधिकारियों एवं वर्गों की स्वार्थ-सिद्धि के लिए होता है।
State craft
राजकला, शासनकला राज्य कार्यों के कुशल संचालन की कला जिसमें छल, कपट, मिथ्या आचरण और प्रवंचना भी शामिल हैं।