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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-VI)

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नीर
नीर ढलना- मरते समय आँसू बहना।
मु.

नीर
आत्माभिमान की भावना।
उ.-कहँ वह नीर, कहाँ वह सोभा कहँ रँग-रूप दिखैहै-१-८३।
संज्ञा
[सं.]

नीर
किसी का नीर ढल जाना- आत्माभिमान की भावना का न रह जाना, निर्लज्ज या बेहया हो जाना।
मु.

नीर
द्रव पदार्थ या रस।
संज्ञा
[सं.]

नीर
फोड़े-फफोलो का चेप।
संज्ञा
[सं.]

नीरज
जल में उत्पन्न वस्तु।
संज्ञा
[सं. नीर + ज]

नीरज
कमल।
संज्ञा
[सं. नीर + ज]

नीरज
मोती, मुक्ता।
संज्ञा
[सं. नीर + ज]

नीरद
जलदाता।
संज्ञा
[सं.]

नीरद
बादल।
संज्ञा
[सं.]


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