एक सदस्यीय निर्वाचन-क्षेत्र वह निर्वाचन-क्षेत्र जहाँ से विधान मंडल के लिए केवल एक प्रतिनिधि निर्वाचित किया जाता है। यदि उत्तर प्रदेश की विधान सभा की सदस्य संख्या 430 है तो उत्तर प्रदेश को 430 एक सदस्यीय निर्वाचन-क्षेत्रों में बाँट दिया जाएगा और प्रत्येक क्षेत्र से एक-एक प्रतिनिधि निर्वाचित किया जाएगा। एक सदस्यीय निर्वाचन-क्षेत्र में जिस प्रत्याशी को निर्वाचन में सबसे अधिक मत मिलते है, वह निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है।
Single transferable vote system (= Hare system)
एकल हस्तांतरणीय मतदान पद्धति वह प्रणाली जिसके अनुसार बहु सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिनिधियों का निर्वाचन आनुपातिक प्रणाली से होता है। एक निर्वाचन-क्षेत्र के सभी प्रत्याशियों के नाम एक मतपत्र पर लिखे होते हैं। प्रत्येक मतदाता के पास प्रत्याशियों की संख्या के बराबर ही मत होते हैं। वह अपने मत एक, दो या अधिक प्रत्याशियों को डाल सकता है परन्तु यह आवश्यक है कि वह प्रत्याशियों के नामों के आगे 1, 2, 3, 4 लिखकर अपनी वरीयता प्रकट करे। वह जिस प्रत्याशी के नाम के आगे `1` लिखता है, उसे उसकी पहली पसंद का मत मिलता है। जिस प्रत्याशी के नाम के आगे वह `2` लिखता है उसे उसकी दूसरी पसंद का मत मिलता है और इसी प्रकार क्रम चलता रहता है। यदि कोई प्रत्याशी मतों का एक निश्चित कोटा प्राप्त कर लेता है तो वह निर्वाचित मान लिया जाता है। इस कोटे के निर्धारण का सूत्र यह है कि वैध मत डालने वाले मतदाताओं की कुल संख्या को निर्वाचित होने वाले प्रतिनिधियों की संख्या में 1 जोड़कर भाग दे दिया जाए। परन्तु यदि किसी प्रत्याशी को निर्धारित कोटे के बराबर मत नहीं मिलते तो मतदाताओं की दूसरी वरीयता से मतों को पहली वरीयता के मतों से जोड़ा जाता है ताकि कोई एक उम्मीदवार निर्धारित कोटा प्राप्त कर सके।
Snap vote
आकस्मिक मतदान विधान मंडल अथवा किसी अन्य निकाय में किसी महत्वपूर्ण प्रस्ताव या विधेयक पर सदस्यों द्वारा एकाएक मतदान करके लिया गया निर्णय।
Social contract
सामाजिक संविदा राज्य की उत्पत्ति के संबंध में एक सिद्धांत यह है कि राज्य की उत्पत्ति प्राकृतिक अवस्था में रहनेवाले मनुष्यों के आपसी समझौते के द्वारा हुई है। अतः सामाजिक संविदा की अवधारणा इस सामाजिक समझौते के सिद्धांत का अभिन्न भाग है। सामाजिक समझौते के पक्षकारों और उसकी शर्तों के संबंध में इस सिद्धांत के समर्थकों में मूलभूत मतभेद पाए जाते हैं।
Social equality
सामाजिक समता सामाजिक व्यवस्था में वर्ग, जाति, धर्म, लिंग, निवास, व्यवसाय या इनमें से किसी के आधार पर नागरिकों के बीच किसी प्रकार का भेदभाव न किया जाना और उन्हें कानूनों का समान रूप से संरक्षण प्रदान किया जाना।
Socialism
समाजवाद समाजवाद का मूल सिद्धांत यह है कि उत्पादन के साधनों एवं वितरण और विनिमय की व्यवस्था पर वैयक्तिक स्वामित्व न होकर सार्वजनिक स्वामित्व होना चाहिए ताकि संपत्ति के माध्यम से मनुष्य मनुष्य का शोषण न कर सके। समाजवाद का आदर्श इस वाक्य से प्रकट होता है कि प्रत्येक से उसकी क्षमतानुसार काम लिया जाएगा और प्रत्येक को उसके काम के अनुसार पारिश्रमिक दिया जाएगा। एक प्रकार से समाजवाद वैज्ञानिक समाजवाद का संशोधित रूप है। वैज्ञानिक समाजवाद से इसका मूलभूत अंतर यह है कि यह अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए लोकतांत्रिक संसदीय प्रणाली एवं संवैधानिक साधनों की सार्थकता को स्वीकार करता है। वास्तव में मार्क्स् के पश्चात् अनेक संशोधनवादी विचारधाराओं ने यूरोप में जन्म लिया जिसमें कुछ नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं जैसे फेबियमवाद श्रेणी समाजवाद, श्रम संघवाद, लोकतांत्रिक समाजवाद। इसीलिए आज समाजवाद की परिभाषा करना अत्यंत कठिन तथा जटिल कार्य है। सी. ई. एम. जोड के शब्दों में समाजवाद वह टोपी है जिसका आकार ही विकृत हो गया है क्योंकि हर प्रकार का व्यक्ति इसे पहनने लगा है।
Society of nations
राष्ट्र-समाज विश्व के विभिन्न राज्य अपनी पारस्परिकता के कारण एक समूह मात्र न होकर, एक दूसरे से इतने संबद्ध हो गए हैं कि उन्हें एक समाज के रूप में देखा जा सकता है। वस्तुतः उनकी पारस्परिकता में वे सभी प्रमुख गुण विद्यमान है जो एक समाज में पाए जाते हैं-जैसे समाज हितों एवं उद्देश्यों का होना, जिनकी प्राप्ति के लिए इनमें सतत रूप से संसर्ग होना।
Sophistry
वितंडा, कुतर्क वह तर्क जो अपने आप में तो युक्तिसंगत प्रतीत होता है परंतु वास्तव में भ्रांतिमय या मिथ्या होता है।
Sovereign
संप्रभु वह व्यक्ति अथवा व्यक्ति-समूह जिसमें राज्य की सर्वोच्च शक्ति अथवा सत्ता का निवास होता है।
Sovereignty
प्रभुता, संप्रभुता, प्रभुसत्ता राज्य के चार तत्वों में से एक तत्व जो सबसे मुख्य तत्व है और जिसके आधार पर राज्य और अन्य मानवीय समुदायों में भेद किया जाता है। `संप्रभुता` का अर्थ है सर्वोच्च शक्ति अर्थात् वह शक्ति जिसकी आज्ञा का पालन राज्य में रहने वाले सभी व्यक्तियों द्वारा अनिवार्य है। प्रसिद्ध फ्रांसीसी विदान बोदा ने `संप्रभुता` की परिभाषा करते हुए लिखा है कि `नागरिकों और प्रजाजनों के ऊपर वह सर्वोच्च शक्ति जो किसी कानून से सीमित नहीं है, संप्रभुता कहलाती है`। आॅस्टिन ने भी संप्रभुता को राज्य की सर्वोच्च शक्ति माना है जो असीमित, अमर्यादित, अदेय और क़ानूनों का स्रोत होती है।