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Rajaneetivijnan Paribhasha Kosh (English-Hindi)
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Recongnition of insurgency
विद्रोहकारिता को मान्यता लॉटर पैक्ट के अनुसार विद्रोहकारिता की मान्यता से कोई विधिक स्थिति उत्पन्न नहीं होती। गृहयुद्ध में विद्रोहकारियों को कुछ अधिकार दिए जा सकते हैं जो पूर्ण युद्धकारी अधिकारों से कम होते हैं। यह इसलिए किया जाता है कि विद्रोहकारियों को न तो युद्धकारियों वाली मान्यता दी जा सकती है और न ही उनकी पूर्णतया उपेक्षा की जा सकती है। अतः उन्हें मान्यता देनेवाला राज्य, परिस्थितियों के अनुसार, उन्हें युद्धकारियों के कुछ अधिकार देना स्वीकार कर सकता है। इस स्थिति को `विद्रोहकारियों को मान्यता` कहा जाता है। इसका उदाहरण है स्पेन के गृहयुद्ध में विद्रोहकारियों को ब्रिटेन द्वारा दी गई मान्यता। परंतु पिछले पचास वर्षों में इसका कोई उदाहरण नहीं मिलता।

Recognition of opposition
विपक्ष को मान्यता संसद में सत्तारूढ़ दल के अतिरिक्त सर्वाधिक स्थान पाने वाले दल या दलसमूह को विपक्ष के रूप में स्वीकार किया जाना। इसके नेता को विपक्ष का नेता माना जाता है और उसे मंत्री के समतुल्य दर्जा व सुविधाएँ प्राप्त होती हैं। भारतीय लोकसभा में स्पीकर श्री मावलंकर ने यह निर्णय दिया था कि विपक्ष के रूप में उसी दल या दल-समूह को मान्यता दी जाएगी जिसके सदस्यों की संख्या पूरे सदन की संख्या के कम से कम 1/10 भाग के बराबर हो।

Red Square
लाल चौक सोवियत संघ की राजधानी मास्को का प्रसिद्ध ऐतिहासिक चौक जहाँ क्रेमलिन सहित सोवियत सरकार के सभी कार्यालय स्थित है और जहाँ मृत लेनिन का शरीर ताबूत में सुरक्षित रखा गया है। इस चौक में प्रायः ऐतिहासिक अवसरों पर शीर्ष सोवियत नेताओं के सन्मुख सैनिक व असैनिक परेड और रैलियाँ आयोजित की जाती हैं जैसे कि मई दिवस तथा अक्तूबर क्रांति दिवस के समारोह।

Referendum
परिपृच्छा, मतसंग्रह किसी विधेयक अथवा संवैधानिक या सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर सर्वसाधारण की विधिवत् राय जानने की प्रक्रिया। कुछ देशों में संवैधानिक संशोधनों पर अनिवार्य रूप से मतसंग्रह कराना आवश्यक होता है परंतु साधारण विधेयकों पर एक निर्धारित अवधि के भीतर निर्धारित जनसंख्या की माँग पर ही मतसंग्रह कराया जाता है, अन्यथा नहीं। मतसंग्रह प्रत्यक्ष लोकतंत्र का एक अभिकरण माना जाता है।

Reform Act
सुधार क़ानून उन्नीसवीं शताब्दी में ब्रिटेन में कॉमनसभा को जनप्रतिनिधिमूलक बनाने के लिए एवं मताधिकार का प्रसार करने के लिए तीन क़ानून क्रमशः 1832, 1867 और 1884 में पारित किए गए। इनका उद्देश्य अधिकाधिक नागरिकों को मताधिकार प्रदान करना था। 1884 के क़ानून के उपरांत सभी वयस्क पुरुषों को मताधिकार प्राप्त हो गया। ये तीनों क़ानून ब्रिटिश संवैधानिक इतिहास में सुधार क़ानूनों के नाम से विख्यात हैं।

Reformation
सुधार आंदोलन, धर्म सुधार पंद्रहवीं शताब्दी में रोमन कैथोलिक चर्च में व्याप्त बुराइयों एवं अनाचार के विरुद्ध जर्मनी से प्रारंभ हुआ आंदोलन जिसका लक्ष्य ईसाई धर्म में सुधार लाना था। इसका श्रीगणेश बूर्तबर्ग के गिरजे के बाहर दीवार पर चिपकाई गई मार्टिन लूथर नामक पादरी की 22 अभिधारणाओं से हुआ। इनमें पोप, पादरियों एवं चर्च की कार्यप्रणाली में सुधार लाने की माँग प्रचारित की गई थी। लूथर द्वारा प्रारंभ किया गया यह आंदोलन पूरे यूरोप में प्रोटेस्टेन्ट आंदोलन के नाम से फैल गया। स्कॉटलैंड में काल्विन और स्विटजरलैंड में ज्विंगले ने इसका नेतृत्व किया। इस आंदोलन से कैथोलिक चर्च की नींव हिल गई और लगभग सभी यूरोपीय देशों में ईसाई धर्मावलंबियों में विभाजन हो गया। इस आंदोलन के फलस्वरूप पोप की तानाशाही समाप्त हो गई और ईसाई धर्म में फैली कुरीतियों के प्रति जनजागरण आरंभ हुआ।

Reformative theory of punishment
दंड का सुधारात्मक सिद्धांत यह दंड के तीन सिद्धांतों में से एक है। अन्य दो हैं- प्रतिशोधात्मक तथा निवारक सिद्धांत। सुधारात्मक सिद्धांत के अनुसार दंड का उद्देश्य न तो प्रतिशोध होना चाहिए और न भय उत्पन्न करना बल्कि अपराधी का सुधार करना होना चाहिए ताकि दंड की समाप्ति होने पर वह उपयोगी नागरिक बन सके। इस उद्देश्य से कारावास की अवधि में उसके मानसिक परिष्कार तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था पर ध्यान दिया जाना जाहिए। इस प्रकार के अनेक प्रयोग, यहाँ तक कि खुली जेलों का प्रयोग, भारत सहित अनेक देशों में हो रहे हैं।

Regency
प्रतिशासन व्यवस्था, रीजेन्सी दे. regent.

Regent
प्रतिशासक किसी शासक की मृत्यु के पश्चात् उसका उत्तराधिकारी यदि वयस्क न हो ती एक अंतरिम व्यवस्था के रूप में राजघराने से संबंधित किसी वरिष्ठ सदस्य को कार्यवाहक शासक नियुक्त कर दिया जाता है जिसे प्रतिशासक या रीजेन्ट कहते हैं। जब यह उत्तरदायित्व एक व्यक्ति के स्थान पर एक परिषद् को सौंपा जाता है जो उसे `रीजेन्सी` कहते हैं।

Regimentation
विबंधन वह स्थिति जब शासक दल पूरे समाज को अपने अनुकूल मूल्यों, आदर्शों, संस्थाओं व सिद्धांतों के अनुरूप ढालने तथा आचरण करने के लिए प्रेरित प्रशिक्षित अथवा बाध्य करे।


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