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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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सौभग
ऎश्वर्य।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

सौभग
सौंदर्य।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

सौभद्र
सभद्रा का पुत्र, अभिमन्यु।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

सौभरि
एक ऋषि जिन्‍होंने यमुना में एक मत्स्य को मछलियों से भोग करते देख, काम-वासना से मान्धाता की पचास कन्याओं से विवाह करके उनसे पाँच हजार पुत्र उत्पन्न किये। अंत में भोग से तृप्ति न होते देख विरक्त होकर कठोर तपस्या करने के उपरंत शरीर त्याग दिया था।
संज्ञा
पुं.
(सं.)
उ.- सौभरि रिषि जमुना-तट गयौ। तहाँ मच्छ इक देखत भयौ-९-८।

सौभागिन, सौभागिनि, सौभागिनी
सधवा या सुहागिन स्त्री।
संज्ञा
स्त्री.
(सं. सौभाग्य)

सौभाग्य
खुशकिस्मती, अच्छा भाग्य।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

सौभाग्य
सुख, आनंद।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

सौभाग्य
कुशल-क्षेम।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

सौभाग्य
स्त्री के सधवा होने की अवस्था।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

सौभाग्य
ऎश्वर्य; वैभव।
संज्ञा
पुं.
(सं.)


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