फेलाप्टोन
तृतीय आकृति का वह प्रामाणिक न्यायवाक्य जिसका साध्य आधारवाक्य सर्वव्यापी निषेधात्मक पक्ष-आधारवाक्य सर्वव्यापी विध्यात्मक तथा निष्कर्ष अंशव्यापी निषेधात्मक होता है।
जैसे : कोई भी मनुष्य पूर्ण नहीं है;
कुछ मनुष्य विवेकशील हैं;
∴ कुछ विवेकपूर्ण प्राणी पूर्ण नहीं हैं।
Ferio
फेरीयो
प्रथम आकृति का वह प्रामाणिक न्यायवाक्य जिसका साध्य-आधारवाक्य सर्वव्यापी निषेधात्मक पक्ष-आधारवाक्य अंशव्यापी विध्यात्मक, तथा निष्कर्ष अंशव्यापी निषेधात्मक होता है।
उदाहरण : कोई बंगाली यूरोपीय नहीं है;
कुछ दार्शनिक बंगाली हैं;
∴ कुछ दार्शनिक यूरोपीय नहीं हैं।
Ferison
फेरिसोन
तृतीय आकृति का वह प्रामाणिक न्यायवाक्य जिसका साध्य-आधारवाक्य सर्वव्यापी निषेधात्मक, पक्ष-आधारवाक्य अंशव्यापी विध्यात्मक और निष्कर्ष अंशव्यापी निषेधात्मक होता है।
उदाहरण : कोई भी मनुष्य बंदर नहीं है;
कुछ मनुष्य नीग्रो हैं;
∴ कुछ नीग्रों बंदर नहीं है।
Fesapo
फेसापो
चतुर्थ आकृति का वह प्रामाणिक न्यायवाक्य जिसका साध्य-आधारवाक्य सर्वव्यापी निषेधात्मक, पक्ष-आधारवाक्य सर्वव्यापी विध्यात्मक तथा निष्कर्ष अंशव्यापी निषेधात्मक होता है।
उदाहरण : कोई भी बंदर मनुष्य नहीं हैं;
कुछ मनुष्य द्विपद हैं;
∴ कुछ द्विपद बंदर नहीं है।
Festino
फेस्टीनो
द्वितीय आकृति का वह प्रामाणिक न्यायवाक्य जिसका साधय - आधारवाक्य सर्वव्यापी निषेधात्मक, पक्ष-आधारवाक्य अंशव्यापी विध्यात्मक तथा निष्कर्ष अंशव्यापी निषेधात्मक होता है।
उदाहरण : कोई भी मनुष्य बंदर नहीं है;
कुछ प्राणी बंदर हैं;
∴ कुछ प्राणी मनुष्य नहीं हैं।
Fiat
एवमस्तु, अनुज्ञप्ति
`ऐसा हो जाए`; का लैटिन रूपान्तर, जिसके (ईश्वर या किसी दैवी-शक्ति-संपन्न पुरूष द्वारा) उच्चारण मात्र से इष्ट वस्तु की सृष्टि हो जाने की बात मानी जाती है। ईश्वर के उच्चारण मात्र से सृष्टि का उत्पन्न होना।
Fiction
कल्पितार्थ, कल्पना
मन के द्वारा निर्मित कोई रचना जिसकी संगति में संसार में कोई वस्तु उपलब्ध न हो। बट्रेण्ड रसल ने अपनी रचनाओं में भौतिक वस्तुओं को तार्किक निर्मितियाँ (logical constructions) एवं आत्माओं को तार्किक गल्प (logicl fiction) के नाम से अभिहित किया है। इन निर्मितियों एवं गल्पों को भी कल्पना का नाम दिया जा सकता है।
Fictionalism (Fictionism)
कल्पनावाद
विशेषतः जर्मन दार्शनिक हान्स वैहिंगर (Hans Vaihinger) द्वारा प्रस्तावित वह मत कि विज्ञान, गणित, दर्शन और धर्म के मूल संप्रत्यय शुद्ध कल्पनाएँ हैं, पर फिर भी व्यवहार में उनकी उपयोगिता है।
Fiction Of Mean Values
मध्यमान-कल्पितार्थ
औसत का संप्रत्यय जो कि वास्तविक न होते हुए भी गणना करने में उपयोगी होता है। जैसे : औसत आयु, यदि चार लड़के क्रमशः 12, 14, 18 और 10 वर्ष के हैं तो उनकी औसत आयु 13-½ वर्ष की है, जबकी उनमें से कोई भी वस्तुतः इस आयु का नहीं है।
Fideism
आस्थावाद
वह सिद्धांत कि संपूर्ण ऊन का आधार आस्था है। देखिए `faith`।