आभासी-सरलता-दोष
दो प्राक्कल्पनाओं में से जो सरल हो उसे सत्य मान लेने का दोष।
Fallacy Of Undistributed Middle
अव्याप्त देतु-दोष
जब किसी न्यायवाक्य में मध्यम-पद आधारवाक्यों में एक बार भी व्याप्त नहीं होता तो उसे अव्याप्त मध्यम-पद-दोष कहा जाता है।
उदाहरण : `सभी मनुष्य जानवर हैं` तथा `सभी कुत्ते जानवर हैं` अतः `सभी कुत्ते मनुष्य है`। इस युक्ति में 'जानवर' पद में अव्याप्त मध्यम-पद-दोष विद्यमान है।
Fallacy Of Unproved Hypothesis
असिद्ध-प्राक्कल्पना-दोष
किसी बात की व्याख्या के लिए प्रस्तावित प्राक्कल्पना के सिद्ध न होने से उत्पन्न दोष।
Fallacy Of Use Mixing
प्रयोग-संकरण-दोष
भाषा के एक प्रकार के प्रयोग (जैसे : संवेगार्थक या आज्ञार्थक प्रयोग) को दूसरे प्रकार (जैसे : संज्ञानार्थक प्रयोग) का मान लेने से पैदा होने वाला दोष।
उदाहरण : `ईसा ने अपने शत्रुओं को प्यार करने का आदेश दिया: लेकिन इसके सत्य होने का कोई प्रमाण नहीं है और इसलिए यह मिथ्या है; अतः जो मिथ्या है उसका अनुसरण मैं नहीं कर सकता।`
False Analogy
मिथ्या साम्यानुमान
वह साम्यानुमान जो दो वस्तुओं के मुख्य गुणों की अपेक्षा उनके गौण गुणों की समानता पर आधारित हो या उपमा और रूपक के प्रयोग पर आश्रित हो।
Falsifiability
मिथ्यापनीयता
कार्ल पॉपर के अनुसार कोई प्रतिज्ञप्ति निर्णायक रूप में सत्यापित तो नहीं की जा सकती किन्तु वह निर्णायक रूप में असत्यापित अवश्य की जा सकती है।
उदाहरण : यदि व्यवहार में 'एक भी कौआ सफेद दिखाई पड़ता है' तो 'सभी कौए काले होते हैं।' यह प्रतिज्ञप्ति मिथ्यापनीय हो जायेगी।
Family Of Sense Data
इंद्रिय प्रदत्त-परिवार
समकालीन अंग्रेज दार्शनिक एच. एच. प्राइस के अनुसार, किसी भौतिक वस्तु से संबंधित इंद्रियदत्तों का समुच्चय, जिसका अन्य भौतिक वस्तुओं के इंद्रियप्रदत्त-समुच्चयों से भेद किया जा सकता है।
Fana
फना, तदाकार होना, लीन होना
मुसलमान सूफियों की मान्यता के अनुसार समाधि की अवस्था जिसमें साधक ईश्वर से एकाकार हो जाता है और अपने अस्तित्व को बिल्कुल भूल जाता है।
Fatalism
भाग्यावाद, दैववाद
वह मत कि मनुष्य जो कुछ भी होता है या करता है वह पहले से ही भाग्य के द्वारा नियत होता है।
Fecundity Of Pleasure
सुख की उर्वरकता
सुखवादी बेन्थम के अनुसार, सुख की अन्य सुखों की जन्म देने की क्षमता।