बहुप्रश्न-दोष
प्रतिवादी से एक ऐसा प्रश्न पूछना जिसमें एक से अधिक प्रश्न छिपे हों, जिनका अलग-अलग उत्तर माँगना ही उचित होता है, अथवा जिसमें कोई ऐसा कथन छिपा होता है जिसकी स्वीकृति प्रतिवादी के पक्ष के लिए घातक होती है पर जिसका उत्तर वह उसे स्वीकार किए बिना नहीं दे सकता।
Fallacy Of Misplaced Concreteness
भ्रान्तमूर्तता-दोष
जो अमूर्त या अपाकृष्ट है उसे मूर्त मान लेने के दोष के लिए ह्वाइटहेड द्वारा प्रयुक्त पद। तदनुसार साधारण जनों के दिक् और काल के संप्रत्यय में यह दोष है।
Fallacy Of Negative Premises
निषेधात्मक आधार-दोष
जब दो निषेधात्मक आधारवाक्यों से निष्कर्ष को निगमित करने का प्रयास किया जाता है तो यह दोष उत्पन्न होता है।
Fallacy Of Non Causa Pro Causa
अकारण-कारण-दोष
किसी कार्य का वास्तविक कारण न होते हुए भी किसी घटना विशेष को उसका कारण मान लेना, अकारण कारण दोष कहलाता है।
Fallacy Of Non Sequitur
नानुमिति-दोष
वह दोषपूर्ण युक्ति जिसमें निष्कर्ष आधारवाक्यों से बिल्कुल असंबद्ध होने के कारण निगमित ही न होता हो।
Fallacy Of Petitio Principii
सिद्ध साधन-दोष
वह दोषपूर्ण युक्ति जिसमें निष्कर्ष आधारवाक्यों में पहले से ही सिद्ध मान लिया जाता है।
Fallacy Of Quoting Out Of Context
असंदर्भोद्धरण-दोष
किसी उक्ति को उसके मूल संदर्भ से हटाकर उद्धृत करने से उत्पन्न दोष।
उदाहरणार्थ : यदि किसी फिल्म-समीक्षक ने कहा हो कि अमुक फिल्म खराब अभिनय और खराब फोटोग्राफी के अलावा निर्दोष है, और कोई वितरक उसे देखने-योग्य बताने के लिए यह उद्धरण दे कि अमुक फिल्म समीक्षक ने उसे निर्दोष कहा है, तो यह दोष होगा।
Fallacy Of Reduction
अपचय-दोष
वस्तुओं का उनके घटकों में विश्लेषण करने की सामान्य वैज्ञानिक प्रणाली के फलस्वरूप इस गलत धारणा का बन जाना कि वस्तुएँ उन घटकों के अतिरिक्त कुछ हैं ही नहीं। जैसे : पानी ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के अतिरिक्त कुछ है ही नहीं।
Fallacy Of Secundum Quid
विशेष-सामान्य भ्रम-दोष
वह दोषपूर्ण युक्ति जिसमें किसी प्रतिज्ञप्ति को जो विशेष परिस्थितियों में ही सत्य होती है, सामान्य रूप से सत्य मान लिया जाता है।
Fallacy Of Selected Instances
दृष्टांत-चयन-दोष
थोड़े-से चुने हुए दृष्टांतों के आधार पर कोई सामान्यीकरण कर लेने का दोष। जैसे : `बंगाली वाचाल होते हैं।`