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Rajaneetivijnan Paribhasha Kosh (English-Hindi)
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Order-in-council
परिषदीय राजाज्ञा, सपरिषद्-आदेश ब्रिटेन में प्रिवी-काउंसिल के परामर्श से, सम्राट अथवा साम्राज्ञी की ओर से जारी किया गया आदेश। ब्रिटिश साम्राज्य के उपनिवेशों के मामलों में भी उक्त प्रकार से जारी किए गए आदेश `सपरिषद-आदेश` कहलाते हैं।

Order of precedence
पूर्वता क्रम किसी राज्य में पदों का, उनकी गरिमा एवं महत्ता की दृष्टि से क्रम निर्धारण।

Ordinance power
अध्यादेश शक्ति भारत में राष्ट्रपति या राज्यपाल को संविधान द्वारा प्रदत्त वह शक्ति जिसके अधीन वह अध्यादेश जारी कर सकता है। इस प्रकार के अध्यादेश केवल संसद अथवा विधानमंडल के सत्रों के अंतराल में जारी किए जा सकते हैं। राज्यों में राष्ट्रपति-शासन होने की दशा में अध्यादेश जारी करने का अधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त है। राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल द्वारा जारी किए गए इन अध्यादेशों का सदनों द्वारा अनुमोदन किया जाना आवश्यक होता है। कोई अध्यादेश संसद अथवा विधान मंडल का अनुमोदन प्राप्त करके अधिक-से-अधिक छह मास तक लागू रह सकता है परन्तु अनुमोदन न मिलने की दशा में वह विधान मंडल के सत्र के शुरू होने के बाद छह सप्ताह से अधिक लागू नहीं रह सकता। अध्यादेशों का वही प्रभाव है जो संसद अथवा विधान मंडल द्वारा निर्मित क़ानूनों का होता है। अध्यादेश को उन सभी विषयों पर जारी किया जा सकता है जिन पर संसद अथवा विधान मंडल को विधि-निर्माण का अधिकार है।

Organizational behaviour
संगठनजन्य व्यवहार, संगठन-व्यवहार, संगठनात्मक व्यवहार किसी राजनीतिक, प्रशासनिक या सरकारी संस्था अथवा संगठन में कार्यकर्ताओं की कार्यकुशलता बढ़ाने तथा उनके बीच सौहार्द बनाए रखने की दृष्टि से उनके प्रति उचित मानवीय व्यवहार। संगठन-व्यवहार में इस बात की अपेक्षा की जाती है कि संस्था के सभी सदस्यों के बीच सौहार्द एवं सहकारिता की भावना बनी रहे। संगठन का व्यवहार इस प्रकार का हो कि उसके लक्ष्यों की पूर्ति उसके सीमित साधनों में संभव हो सके तथा कार्य में किसी प्रकार का अपव्यय या क्षय न हो। कर्मचारियों की निजी समस्याओं तथा उनके काम करने की दशाओं पर भी उचित ध्यान दिया जाना चाहिए।

Organized force
संगठित शक्ति 1. शक्ति-सिद्धांत के अनुसार राज्य शक्ति का पुंज है। अपने सभी तत्वों सहित राज्य शक्ति का सुसंगठित स्वरूप है। 2. राज्य की वह शक्ति जिसके आधार पर राज्य समाज को सुसंगठित रखता है तथा अपनी आज्ञा का पालन कराता है। इस शक्ति के बल पर ही राज्य अपराधियों को दंडित करता है तथा न्यायप्रिय नागरिकों के जीवन स्तर को समुन्नत करने के उपायों को क्रियान्वित करता है। संगठित शक्ति के आधार पर ही राज्य विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रमों को चलाता है और हर प्रकार के आंतरिक एवं बाहय संकटों से नागरिकों की रक्षा करता है।

Orgburean
आर्गब्यूरो सोवियत संघ के साम्यवादी दल के प्रमुख अंगों में से एक अंग जो प्रायः दल के संगठन संबंधी मामलों का संचालन करता था। अब इसका उन्मूलन कर दिया गया है।

Original members
मूल सदस्य किसी संगठन, संधि, संघ अथवा संस्था के संस्थापक सदस्य। जैसे, किसी संधि को सम्पादित करने वाले हस्ताक्षरकर्ता राज्य सान्फ्रान्सिसको सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले 50 राज्य।

Original occupation
मूल आधिपत्य विश्व के किसी ऐसे पूर्णतः अविकसित क्षेत्र अथवा भूभाग को जहाँ ज्ञान तथा सभ्यता का अभ्युदय न हुआ तथा जहाँ पर किसी अन्य राज्य की प्रभुसत्ता न रही हो, किसी राज्य द्वारा प्रथम बार अपने अधिकार में लिया जाना।

Ostracism
देश निकाला एथेंस तथा अन्य यूनानी शहरों में किसी खतरनाक समझे जाने वाले व्यक्ति को, उस पर बिना मुकदमा चलाए या किसी प्रकार का दोषारोपण किए, देश से बाहर निकाल देने की पद्धति। ऐसा प्राय: बहुमत के आधार पर किया जाता था और कभी-कभी ऐसा करने में बल-प्रयोग का सहारा भी लिया जाता था।

Outbreak of hostilities
युद्धारंभ युद्ध अथवा युद्धात्मक कार्रवाइयों का प्रारंभ होना। हेग अनुबंध (1907) के अनुसार युद्ध का प्रारंभ विधिवत् चेतावनी देकर किया जाना चाहिए। दूसरे महायुद्ध से पूर्व तक इस नियम का सामान्यतः पालन हुआ परन्तु 1939 में जर्मनी द्वारा पोलैंड पर बिना किसी चेतावनी के आक्रमण किया गया था और तब से अब तक प्रायः इस अनुबंध की अवहेलना होती रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि 1928 के पश्चात् अग्र-आक्रामक युद्ध अवैध घोषित हो जाने से (जिसका अनुसमर्थन राष्ट्र संघ के प्रसंविदा और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में भी मिलता है) कोई राज्य युद्ध की घोषणा करके अग्र-आक्रमणकारी होने का दोष अपने ऊपर लेना नहीं चाहता।


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