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Braj Bhasha Soor-Kosh (Vol-X)

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सौदर्य
भाईपन, भ्रातृत्व।
संज्ञा
पुं.
(सं.)

सौदा
वह चीज जो खरीदी या बेची जाय।
संज्ञा
पुं.
(अ.)
मुहा.- सच्चा सौदा-खरा सौदा, ऎसा सौदा जिसमें किसी प्रकार का धोखा या हानि न हो।

सौदा
खरीदने-बेचने या लेन-देन की बातचीत।
संज्ञा
पुं.
(अ.)

सौदा
खरीदने-बेचने की बातचीत पक्की करना।
संज्ञा
पुं.
(अ.)
मुहा.- सौदा करना-खरीदने की बात-करना। सौदा कराना-खरीदने की बातचीत कराना। सौदा पटना या होना- खरीदने की बातचीत पक्की होना। सौदा पटाना-खरीदने की बातचीत पक्की करना या कराना।

सौदा
क्रय-विक्रय, व्यापार।
संज्ञा
पुं.
(अ.)
मुहा.- सच्चा सौदा, सौदा साँचौ-खरा व्यापार, व्यापार जिसमें किसी प्रकार का छल-कपट न हो। उ.- सूर स्याम को सौदा साँचौ-१-३१०।

सौदा
सौदा-सुलुफ-खरीदन की चीजैं। सौदा-सूत-व्यापार, व्यवहार।
यौ.

सौदा
पागल, बादला या दीवाना-पन।
संज्ञा
पुं.
(फ़ा.)

सौदा
उर्दू के एक प्रसिद्ध शायर।
संज्ञा
पुं.
(फ़ा.)

सौदाई
पागल, बावला।
संज्ञा
पुं.
(हिं. सौदा)
मुहा.- सौदाई होना- बहुत आसक्त होना। सौदाई बनाना-अपने ऊपर किसी को आसक्त करना।

सौदागर
व्यापारी, व्यवसायी।
संज्ञा
पुं.
(फ़ा.)


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