पण-द्विगुणन-दोष
यह मानने की गलती करना कि चितपट जैसे खेल में, जिसमें विकल्प समान रूप से प्रसंभाव्य होते हैं, यदि कोई एक ही बात पर शर्त लगाता जाए और हारने पर शर्त को दुगना करता जाए तो अंत में वह अवश्य जीतेगा।
Fallacy Of Equivocation
अनेकार्थक दोष
युक्ति में किसी अनेकार्थक शब्द के प्रयोग से उत्पन्न होने वाला दोष।
जैसे : `लाल एक रंग है; रक्त लाल होता है; अतः रक्त एक रंग है।`
Fallacy Of Exclusive Linearity
ऐकान्तिक रेखीयता-दोष
अनुचित रूप से यह मान बैठना कि अनेक तत्व इस प्रकार संबंधित हैं कि उनसे अनिवार्यतः एक रेखावत् क्रम बन जाता है।
Fallacy Of Exclusive Particularity
ऐकान्तिक विशिष्टता-दोष, व्यावर्तक विशेषता-दोष
यह मान लेने का दोष कि यदि एक वस्तु एक संदर्भ में एक संबंध रखती है तो वह उसी या किसी अन्य संदर्भ में कोई अन्य संबंध नहीं रख सकती।
उदाहरण : यदि एक व्यक्ति किसी स्त्री का पति है तो यह मान लेना कि वह किसी का पिता या भाई नहीं हो सकता। इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम आर. बी. पैरी ने विज्ञानवाद का खण्डन एवं वस्तुवाद का खण्डन एवं वस्तुवाद का मण्डन करने के लिये किया था।
Fallacy Of Existential Assumption
अस्तित्वाभिग्रह-दोष
यदि स्पष्ट रूप से यह न बताया गया हो कि एक वस्तु का अस्तित्व है तो उसके अस्तित्व को नहीं मान लेना चाहिए। इस नियम के विपरित अस्तित्व मान लेने का दोष।
Fallacy Of False Cause
मिथ्याकारण-दोष
जो किसी कार्य का कारण नहीं है उसे कार्य का कारण मान लेने का दोष।
Fallacy Of False Conclusion
मिथ्यानिष्कर्ष-दोष
वह दोष जिसमें युक्ति का निष्कर्ष असत्य होता है।
Fallacy Of False Disjunction
मिथ्यावियोजन-दोष
देखिए `fallacy of false opposition`।
Fallacy Of False Opposition
मिथ्याविरोध-दोष
वह मानने का दोष कि सभी विकल्प परस्पर व्यावर्तक होते हैं। जैसे : यह मान लेना कि यदि वस्तुएँ स्थिर हैं तो उनमें परिवर्तन बिलकुल नहीं हो सकता।
Fallacy Of Figures Of Speech
आलंकारिक भाषा-दोष
यह दोष तब होता है जब एक ही व्याकरणिक रूप रखने वाले अथवा एक ही मूल से व्युत्पन्न शब्दों का एक ही अर्थ समझ लिया जाता है।
उदाहरण : चित्रकार वह है जो चित्र बनाता है;
इसलिए चर्मकार वह है जो चमड़ा बनाता है।